आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख नरम? बसपा में फिर बड़ा संगठनात्मक फेरबदल
आकाश आनंद
बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद उनके अगले कदम को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल आकाश आनंद बसपा सुप्रीमो मायावती के सोशल मीडिया पर जारी बयानों को फॉलो कर अपनी निष्ठा जाहिर कर रहे हैं। वहीं, उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी मायावती की नाराजगी कम करने की कोशिश में इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी के भीतर आकाश के भविष्य को लेकर अभी अंतिम फैसला मायावती पर निर्भर बताया जा रहा है।
आकाश आनंद को लेकर बसपा हाईकमान का रुख अभी लचीला
पार्टी में एक बार फिर संगठनात्मक बदलाव किया गया है। बसपा ने युवा चेहरों मोहित आनंद और नितिन सिंह को नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया है। दोनों को इससे पहले हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में संगठन के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी मिली है। हालांकि, मायावती के फैसले के मुताबिक दोनों उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से दूर रहेंगे। इसी बीच आकाश आनंद को लेकर पार्टी हाईकमान का रुख अशोक सिद्धार्थ की तुलना में लचीला बताया जा रहा है।
पार्टी से बाहर नहीं हुए आकाश आनंद
आकाश आनंद से भले ही उनकी सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियां वापस ले ली गई हों, लेकिन उन्हें संगठन को मजबूत करने के काम से पूरी तरह नहीं रोका गया है। यही वजह है कि पार्टी से उनके निष्कासन पर सहमति नहीं बन सकी। अब पार्टी में आकाश आनंद की भूमिका और भविष्य को लेकर अंतिम फैसला मायावती ही लेंगी। इससे उनके समर्थकों के बीच वापसी की उम्मीदें बनी हुई हैं।
भाई ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि आकाश आनंद ने कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उनके खिलाफ लामबंदी किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, उनके छोटे भाई ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर आकाश के समर्थक उनकी पार्टी में वापसी की मांग कर रहे हैं और कुछ पदाधिकारियों पर नेतृत्व को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं।
चुनावी तैयारियों के बीच आकाश आनंद की गैरमौजूदगी पर नजर
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बसपा की अंदरूनी कलह का असर चुनावी रणनीति पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आकाश आनंद की जनसभाओं की मांग कई प्रत्याशी कर रहे थे और सितंबर में पूर्वांचल में उनकी कई जनसभाओं का कार्यक्रम भी तय था। अब जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद उनकी भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हैं। समर्थकों की वापसी की मांग और संगठन में लगातार हो रहे बदलाव के बीच यह देखना अहम होगा कि मायावती आकाश आनंद को लेकर आगे क्या फैसला करती हैं।
