सपा-कांग्रेस गठबंधन: सीट बंटवारे पर फंसा पेंच, कांग्रेस 100+ सीटों पर ठोक रही दावा
सपा-कांग्रेस गठबंधन
सपा-कांग्रेस गठबंधन: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंसता नजर आ रहा है। कांग्रेस जहां जल्द से जल्द सीटें तय किए जाने के पक्ष में है, वहीं समाजवादी पार्टी अभी जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए और वक्त चाहती है। सपा का जोर जीतने की क्षमता पर है, जबकि कांग्रेस अपनी बढ़ती ताकत और 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रही है। दोनों दलों ने अपने-अपने आंतरिक सर्वे भी कराए हैं और एक-दूसरे को इसकी जानकारी दे चुके हैं।
कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर जीत का दावा कर रही
सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच सबसे बड़ा मतभेद सीटों की संख्या को लेकर है। सपा के आंतरिक सर्वे में उसे 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी ज्यादा सीटें मिलती दिखाई गई हैं, लेकिन बहुमत से वह अभी भी दूर है। वहीं कांग्रेस ने 100 से ज्यादा सीटों को जीतने योग्य माना है। कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को आधार बनाकर सीटें मांग रही है। साथ ही उसकी कोशिश है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले से कम से कम एक सीट पर चुनाव लड़कर राज्यभर में अपनी मौजूदगी दिखाई जाए।
सपा के लिए ‘छोटे भाई’ से ज्यादा भूमिका मांग रही कांग्रेस
सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस अब पहले की तुलना में ज्यादा अहम भूमिका चाहती है। पार्टी छोटे भाई की भूमिका से आगे बढ़कर सीटों में बेहतर हिस्सेदारी की मांग कर रही है, जिसे सपा के लिए स्वीकार करना आसान नहीं है। हालांकि दोनों दल इस बात को मानते हैं कि अगर सपा के मौजूदा वोट आधार के साथ कांग्रेस अतिरिक्त वोटरों को जोड़ने में सफल रहती है तो गठबंधन को फायदा हो सकता है। सपा ने कांग्रेस को यह संदेश भी दिया है कि सीटों के साथ संभावित प्रत्याशियों के नाम तय किए जाएं, ताकि जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सीटों का बंटवारा किया जा सके।
सपा 111 जीती सीटों पर खुद उतरेगी, कांग्रेस को 75-80 सीटों का संकेत
सीट बंटवारे के मौजूदा फॉर्मूले में सपा अपनी 2022 में जीती सभी 111 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की तैयारी में है। पार्टी के ज्यादातर विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने के लिए कहा गया है। वहीं कांग्रेस को भाजपा की जीती हुई सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका देने की बात सामने आई है। सपा पहले कांग्रेस को 2022 में अपने सहयोगियों को दी गई सीटों के आसपास यानी 60 से कम सीटें देने की तैयारी में थी, लेकिन बदले राजनीतिक हालात में यह संख्या बढ़कर 75 से 80 सीटों तक जा सकती है। पार्टी छोड़कर जाने वाले विधायकों को हराने के लिए भी कांग्रेस के सहयोग से रणनीति बनाने की बात कही गई है।
2024 की कामयाबी दोहराने की चुनौती, युवा और महिलाओं पर नजर
सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए की बिसात पर मिली कामयाबी को विधानसभा चुनाव में दोहराने की है। हालांकि दोनों दल मानते हैं कि मुद्दों और राजनीतिक माहौल में बदलाव आया है और वोटरों का मूड भी बदल सकता है। अब जेन जी को साधना भी अहम माना जा रहा है, जो पीडीए के पारंपरिक खांचे में खुद को नहीं मानता। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी जेन जी के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युवाओं और महिलाओं का समर्थन हासिल करने के लिए अलग रणनीति पर काम शुरू किया है। ऐसे में सीट बंटवारे के साथ दोनों दलों की चुनावी रणनीति भी सपा-कांग्रेस गठबंधन की दिशा तय करेगी।
