भारत की कूटनीति: इजरायल का सच्चा दोस्त, ईरान का भी करीबी; दुनिया क्यों दे रही मिसाल?
भारत की कूटनीति
भारत की कूटनीति एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींच रही है। इसकी वजह है इजरायल और ईरान जैसे दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध। एक तरफ इजरायल भारत को अपना सच्चा मित्र बता रहा है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ भी भारत के करीबी रिश्ते लगातार नजर आ रहे हैं। यह संतुलन भारत की उस विदेश नीति को दिखाता है, जिसमें अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों को ध्यान में रखते हुए संबंध बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। हाल ही में इजरायली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से यहूदी नववर्ष रोश हशनाह की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देते हुए भारत को इजरायल का सच्चा मित्र बताया।
इजरायल ने भारत को बताया सच्चा दोस्त
भारत की कूटनीति की मजबूती का एक उदाहरण इजरायली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग का बयान भी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार जताया और इजरायल की जनता की ओर से भारत को शांति, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और सद्भाव की शुभकामनाएं दीं। हर्जोग ने दोनों देशों के बीच दोस्ती के गहरे बंधन के और मजबूत होने की कामना की। खास बात यह है कि यह बयान उस समय आया जब भारत ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ईरान का भी गर्मजोशी से स्वागत किया था।
मोदी-नेतन्याहू की दोस्ती ने रिश्तों को दी नई मजबूती
भारत और इजरायल के रिश्तों में पिछले एक दशक के दौरान काफी मजबूती आई है। भारत की कूटनीति में इजरायल एक अहम रणनीतिक साझेदार के तौर पर नजर आता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल की जनता को शुभकामनाएं दीं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार को बधाई दी। दोनों देशों के बीच रक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी समान सोच का उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे के दौरान दोनों नेताओं की दोस्ती भी चर्चा में रही थी।
ईरान से भी मजबूत रिश्ते, भारत की संतुलित नीति चर्चा में
भारत की कूटनीति का दूसरा अहम पक्ष ईरान के साथ संबंध हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से ईरान का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तेहरान आने का न्योता भी दिया है। ऐसे समय में जब इजरायल और ईरान एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं, भारत का दोनों देशों के साथ संबंध बनाए रखना उसकी संतुलित विदेश नीति को रेखांकित करता है। यही वजह है कि भारत की कूटनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई है।
भारत की कूटनीति की असली ताकत क्या है?
भारत की कूटनीति का सबसे बड़ा संदेश यही है कि देश अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ा सकता है। इजरायल भारत को सच्चा मित्र बता रहा है, वहीं ईरान के साथ भी उच्चस्तरीय संपर्क कायम है। इस पूरे घटनाक्रम में भारत की कोशिश किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने की दिखाई देती है। यही संतुलन भारत को वैश्विक कूटनीति में एक अलग स्थान देता है और उसकी विदेश नीति की ताकत को सामने लाता है।
