मक्का पर हमला: हूती ड्रोन के सऊदी दावे के बाद बढ़ी चिंता, जानिए इतिहास के बड़े हमले
मक्का पर हमला
मक्का पर हमला: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच मक्का पर हमला किए जाने के सऊदी अरब के दावे ने चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब के मुताबिक, हूती विद्रोहियों की ओर से मक्का की दिशा में भेजे गए एक ड्रोन को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया गया। इसके बाद मक्का में आपातकालीन ‘एयर रेड अलर्ट’ जारी किया गया, जिसे खतरा टलने के बाद हटा लिया गया। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के दावे को खारिज करते हुए इसे गलत जानकारी बताया है।
मक्का की सुरक्षा पर सऊदी अरब ने बताया ‘रेड लाइन’
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और वहां आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा एक ‘रेड लाइन’ है। मौजूदा घटनाक्रम में मक्का पर हमला होने का दावा सामने आने के बाद पवित्र शहर की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस घटना को लेकर सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के दावे अलग-अलग हैं, इसलिए मामले में दोनों पक्षों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
2017 में भी मक्का की ओर मिसाइल का दावा
मक्का पर हमले या उसे निशाना बनाए जाने की घटनाएं इससे पहले भी चर्चा में रही हैं। जुलाई 2017 में यमन की तरफ से हूती विद्रोहियों द्वारा मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने का सऊदी दावा सामने आया था। सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने इसे मक्का से करीब 69 किलोमीटर दूर अल-वासिया क्षेत्र में नष्ट कर दिया था। हालांकि, हूतियों ने उस समय दावा किया था कि मिसाइल का निशाना सैन्य अड्डा था, मक्का नहीं।
1979 में ग्रैंड मस्जिद पर हुआ था बड़ा कब्जा
आधुनिक इतिहास में मक्का का सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा संकट 1979 में सामने आया, जब जुहैमान अल-उतैबी के नेतृत्व में 200 से अधिक सशस्त्र लोगों ने मस्जिद अल-हरम पर कब्जा कर लिया था। हजारों श्रद्धालुओं को बंधक बनाए जाने के बाद सऊदी सुरक्षा बलों ने करीब दो सप्ताह तक परिसर में अभियान चलाया। इस संघर्ष में मस्जिद परिसर को भारी नुकसान पहुंचा। यह घटना मक्का के इतिहास में एक बेहद गंभीर सुरक्षा संकट के रूप में दर्ज है।
683 से 930 तक मक्का पर हुए बड़े ऐतिहासिक हमले
मक्का पर हमला केवल आधुनिक दौर की चिंता नहीं रहा है। 683 ईस्वी में उमय्यद सेना की घेराबंदी के दौरान कैटापलट हमलों से काबा को नुकसान पहुंचने और आग लगने का उल्लेख मिलता है। 692 ईस्वी में अल-हज्जाज इब्न युसूफ ने भी मक्का की घेराबंदी की थी। वहीं 930 ईस्वी में कर्मतियन आक्रमण के दौरान तीर्थयात्रियों पर बड़े हमले का उल्लेख मिलता है और हमलावर हजर-ए-अस्वद को अपने साथ ले गए थे। इन घटनाओं से पता चलता है कि मक्का की सुरक्षा का सवाल इतिहास के अलग-अलग दौर में बेहद संवेदनशील रहा है।
