September 24, 2026

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जितिया व्रत 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है कठिन व्रत, जानें क्या करें और क्या नहीं

जितिया व्रत 2026

जितिया व्रत 2026

जितिया व्रत 2026: हिंदू धर्म में जितिया व्रत 2026 को संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस व्रत को विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। परंपरा के अनुसार माताएं संतान के सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत करती हैं।

जितिया व्रत 2026 में इन 5 बातों से करें परहेज

जितिया व्रत 2026 के दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत के दौरान जल या भोजन ग्रहण नहीं किया जाता, क्योंकि यह निर्जला उपवास होता है। संतान की मंगलकामना के लिए धारण किया जाने वाला जितिया धागा भी स्वच्छ और सही अवस्था में होना चाहिए। टूटे या गंदे धागे का इस्तेमाल करने से बचने की मान्यता है। इसके अलावा व्रत के दिन क्रोध, विवाद और कटु वाणी से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

जितिया व्रत 2026: सात्विकता और संयम का रखें ध्यान

जितिया व्रत 2026 में घर के वातावरण और भोजन में भी सात्विकता को महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा जैसे पदार्थों से परहेज किया जाता है। व्रत रखने वाली माताओं को अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में संयम रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही किसी के प्रति बुरा विचार रखने या जानबूझकर किसी का अहित करने से बचने की परंपरा है।

जितिया व्रत 2026: नहाय-खाय से शुरू होती है तैयारी

जितिया व्रत 2026 से एक दिन पहले नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। परंपरा के अनुसार मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाने की मान्यता है। जितिया व्रत के दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और माता जितिया का स्मरण किया जाता है। इसके बाद निर्धारित तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है।

जितिया व्रत 2026: पारण के बाद दान की भी परंपरा

जितिया व्रत 2026 का पारण निर्धारित तिथि पर किया जाता है। पारण में पारंपरिक रूप से मड़ुआ की रोटी और साग ग्रहण करने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है। हालांकि निर्जला व्रत स्वास्थ्य के लिए कठिन हो सकता है। गर्भवती, बीमार, बुजुर्ग या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना गया है।

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