Donald Trump का बड़ा बयान: ‘फ्रांस अपनी सीमाएं खोलकर भुगत रहा है नुकसान’, इमिग्रेशन नीति पर छिड़ी बहस
Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने फ्रांस के मौजूदा हालात के लिए उसकी सीमा और इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप का दावा है कि फ्रांस ने ऐसे लोगों के लिए अपनी सीमाएं खोल दीं, जो देश और वहां के नागरिकों से नफरत करते हैं। जॉर्जिया के पेरी में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए आयोजित चुनावी रैली में बोलते हुए उन्होंने फ्रांस के हालात की तुलना अमेरिका की इमिग्रेशन नीति से की। हालांकि, फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे महंगाई और शिक्षा के लिए फंड की कमी जैसे मुद्दे भी बताए जा रहे हैं।
इमिग्रेशन नीति को ठहराया जिम्मेदार
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि फ्रांस में पुलिस मौजूद है, लेकिन उसे अपना काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस ने ऐसे लोगों को देश में आने दिया, जो फ्रांस और उसके नागरिकों के खिलाफ हैं। ट्रंप ने इन प्रदर्शनों को शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित मानने से भी इनकार किया। उनके बयान के मुताबिक, किसी भी देश को अपनी सीमाओं और सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाना चाहिए। हालांकि, ये ट्रंप के राजनीतिक दावे हैं और फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारणों को समझने के लिए वहां की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
अमेरिकी इमिग्रेशन नीति का जिक्र कर जॉर्जिया के सीनेटर पर निशाना
फ्रांस का मुद्दा उठाते हुए ट्रंप ने अमेरिका की इमिग्रेशन नीति का भी बचाव किया। उन्होंने जॉर्जिया के सीनेटर जॉन ओसॉफ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह बड़ी संख्या में ऐसे प्रवासियों को अमेरिका लाना चाहते हैं, जो देश के हितों के खिलाफ हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार देश की सुरक्षा और सीमाओं को लेकर सख्त नीति अपना रही है। ट्रंप का यह बयान अमेरिका में आव्रजन, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी नागरिकों के प्रवेश को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है।
फ्रांस में महंगाई और शिक्षा के मुद्दे पर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और शिक्षा के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने जैसे मुद्दों को लेकर कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण थे, लेकिन शनिवार देर शाम पेरिस में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भारी झड़पें हुईं। इन घटनाओं के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस के साथ टकराव की घटनाओं ने फ्रांस में कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।
पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का किया इस्तेमाल
यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में हालात पर काबू पाने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। विरोध-प्रदर्शन पेरिस के अलावा लियोन, लिले, मार्सिले, मोंटपेलियर, नान्तेस और टूलूज जैसे प्रमुख शहरों तक फैल गए। फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांसीसी सरकार ने देशभर में करीब 4 लाख 10 हजार प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने की बात कही, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट के अनुसार, करीब 100 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। इन घटनाओं के बीच फ्रांस की इमिग्रेशन नीति और विरोध-प्रदर्शनों के वास्तविक कारणों को लेकर बहस तेज हो गई है।
