ट्रम्प रूस प्रतिबंध पर बड़ा फैसला, रूस से तेल खरीदने वाले देशों को 100% टैरिफ से राहत
डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून को फिलहाल रोक दिया है। शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प ने इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल थे। इस कानून का उद्देश्य रूस की कमाई के रास्ते सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए उसे आर्थिक संसाधन जुटाने में मुश्किल हो।
ट्रम्प रूस प्रतिबंध कानून और लिंडसे ग्राहम एक्ट का पूरा मामला
रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े लिंडसे ग्राहम एक्ट पर ट्रम्प ने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून के अनुसार, ट्रम्प को 30 दिनों के भीतर प्रतिबंधों को लेकर फैसला करना था। हालांकि, उन्होंने निर्धारित समय से पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। इस फैसले के बाद अमेरिका में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कुछ सांसदों ने रूस को राहत देने के कदम पर सवाल उठाए हैं।
भारत पर ट्रम्प रूस प्रतिबंध का क्या पड़ सकता था असर?
भारत के लिए यह फैसला खास मायने रखता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत थी। भारत ने इस दौरान रूस से प्रतिदिन औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भारत की ऊर्जा जरूरतों और आयात लागत के लिए चिंता का विषय बन सकता था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखता है।
तेल की कीमतें और अमेरिकी मिडटर्म चुनाव भी अहम वजह
ट्रम्प का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में संकट के बीच वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले पेट्रोल की कीमतें और महंगाई भी अहम मुद्दे हैं। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम रहें, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। ऐसे में रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने से ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी विचार करना जरूरी है।
रूस को राहत देने पर ट्रम्प की आलोचना, यूक्रेन और यूरोप ने जताई नाराजगी
रूस को प्रतिबंधों से राहत देने के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की है। खबर के मुताबिक, ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने से जुड़े समझौते का भी ऐलान किया था, जिसके तहत रूसी डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में अप्रैल 2027 तक छूट दी गई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय अधिकारियों ने इस कदम पर नाराजगी जताई। वहीं, अमेरिकी संसद के कुछ सदस्यों ने डीजल बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अब ट्रम्प रूस प्रतिबंध नीति पर आगे क्या रुख अपनाते हैं, इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
