दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, मेट्रो बंद करने से लेकर हिरासत तक पर दी सफाई
सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर और नई दिल्ली के दूसरे इलाकों में प्रस्तावित प्रदर्शनों के दौरान की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया है। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने हलफनामे में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए। पुलिस के मुताबिक, दिल्ली में महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों, वीवीआईपी मूवमेंट, राजनयिक यात्राओं और बड़े आयोजनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट हलफनामा ऐसे समय में आया है, जब प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और आवाजाही को लेकर सवाल उठे थे।
45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने का भेजा गया था प्रस्ताव
दिल्ली पुलिस ने बताया कि 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास गेट बंद रखने का प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को भेजा गया था। पुलिस ने इसके पीछे संवेदनशील इलाकों में भीड़ बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बताई। पुलिस ने मेट्रो ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी कम करने का अनुरोध भी किया था। बाद में 10 अक्टूबर को DMRC को पत्र लिखकर पाबंदियां हटाने और रात 10 बजे से मेट्रो का सामान्य संचालन शुरू करने को कहा गया। हलफनामे में पुलिस ने दावा किया कि मेट्रो से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पहले ही लागू किए जा चुके थे।
ट्रैफिक डायवर्जन के लिए लगाए गए 88 साइन बोर्ड
हलफनामे के मुताबिक, 10 और 11 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से कई प्रमुख सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया था। लोगों को यात्रा की योजना पहले बनाने, गैर-जरूरी सफर से बचने और ट्रैफिक पुलिस के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यातायात व्यवस्था संभालने के लिए 88 डायवर्जन फ्लेक्स साइन बोर्ड लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा और ट्रैफिक की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी, ताकि जरूरत के मुताबिक कदम उठाए जा सकें।
इंटरनेट बंद नहीं, मोबाइल इंटरनेट पर सीमित पाबंदियों का दावा
दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में कहा कि पूरे इंटरनेट को बंद नहीं किया गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तय नियमों के तहत केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को सीमित किया गया था। पुलिस के मुताबिक, स्थिति के अनुसार इन प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही थी। हलफनामे में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत किसी को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। पुलिस ने दावा किया कि वकीलों, पत्रकारों और दूसरे पेशेवर लोगों को उनके काम करने से नहीं रोका गया।
BNSS की धारा 163 के उल्लंघन पर कार्रवाई की बात
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे। पुलिस ने कहा कि संबंधित नोटिस तय क्षेत्रों में लगाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लगे नोटिस बोर्ड की भी समीक्षा की गई और जरूरत के अनुसार उन्हें हटाया गया। पुलिस ने हलफनामे में कहा कि कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। जरूरत पड़ने पर हालात के हिसाब से उचित कदम उठाए जाएंगे।
