August 27, 2026

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जापान में यूनुस की शांति की अपील, बांग्लादेश में इस्लाम बरी

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने 29 मई, 2025 को जापान की राजधानी टोक्यो में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि एशिया और विश्व में शांति तेजी से मायावी होती जा रही है। युद्ध और मानव निर्मित संघर्ष हजारों लोगों के जीवन और उनकी आजीविका को नष्ट कर रहे हैं। यूनुस ने जोर देकर कहा कि एशिया को वैश्विक स्तर पर एक नया नैतिक दिशा-निर्देश प्रस्तुत करना चाहिए, जो शक्ति के बजाय शांति, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और अल्पकालिक लाभ के बजाय स्थिरता को बढ़ावा दे। यह बयान वैश्विक अशांति के बीच एक सकारात्मक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

यूनुस का यह बयान बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के कुछ दिनों बाद आया, जिसमें जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम को बरी कर दिया गया। इस्लाम पर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान गंभीर अपराधों के आरोप थे, जिनमें 1,256 लोगों की हत्या, 17 लोगों का अपहरण और 13 महिलाओं के साथ बलात्कार शामिल थे। यह फैसला शेख हसीना की सरकार द्वारा पिछले साल दी गई मृत्युदंड की सजा को पलटता है। जमात-ए-इस्लामी ने मुक्ति संग्राम के दौरान इस्लामाबाद का समर्थन किया था, जिसके कारण बांग्लादेश में आज भी इस संगठन के प्रति गुस्सा देखा जाता है।

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अजहरुल इस्लाम का विवादास्पद इतिहास

1952 में रंगपुर जिले के बदरगंज के लोहानीपारा गांव में जन्मे अजहरुल इस्लाम ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान अल-बद्र मिलिशिया के कमांडर के रूप में काम किया था। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी सेना का साथ देकर मुक्ति संग्राम को दबाने की कोशिश की थी। 2014 में उन्हें झारूआरबील नरसंहार की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया, जिसमें रंगपुर डिवीजन में 1,256 लोगों की क्रूर हत्या और 13 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। इस्लाम 2012 से हिरासत में थे और उन्होंने 2015, 2019 और 2020 में अपनी सजा के खिलाफ अपील की थी। अंततः, 27 फरवरी, 2025 को दायर उनकी अपील पर सुनवाई के बाद, मुख्य न्यायाधीश सैयद रेफात अहमद की अगुवाई वाली पूर्ण पीठ ने मंगलवार को उन्हें बरी कर दिया।

शेख हसीना का जमात-ए-इस्लामी पर कड़ा रुख

शेख हसीना ने अपने कार्यकाल के दौरान जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था और इसके कई नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। अजहरुल इस्लाम उन छह वरिष्ठ नेताओं में से एक थे, जिन्हें उनकी सरकार के दौरान दोषी ठहराया गया था। इस फैसले ने बांग्लादेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में गहरे विभाजन को उजागर किया है, क्योंकि 1971 के युद्ध के घाव आज भी ताजा हैं।

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