इंडोनेशिया ने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को सराहा, सांस्कृतिक संबंधों को सहयोग का मजबूत आधार बताया

दक्षिण एशिया में भारत की आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और दृढ़ नीति को अब वैश्विक स्तर पर समर्थन मिल रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, ने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।

इंडोनेशिया के प्रभावशाली इस्लामिक संगठन नहदलातुल उलेमा के कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन केएच उलिल अबशार अब्दाला ने स्पष्ट किया कि इस्लाम शांति का धर्म है और आतंकवाद को इससे जोड़ना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे मुस्लिम समुदाय की छवि को भी नुकसान होता है।

अबशार अब्दाला ने कहा, “कुछ संगठन इस्लाम के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देते हैं, जबकि वास्तव में आतंकवाद का सबसे बड़ा नुकसान मुस्लिम समुदाय को ही होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम की गलत व्याख्या करके हिंसा को वैध ठहराने की कोशिश पूरी तरह निंदनीय है।

भारत-इंडोनेशिया सहयोग: सांस्कृतिक संबंधों पर बल

अब्दाला ने भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा किया है। आज जब दुनिया आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौती से जूझ रही है, ऐसे में भारत और इंडोनेशिया का एकजुट होना बहुत महत्वपूर्ण है।

इंडोनेशिया की राजनीतिक पार्टी नेशनल मैंडेट पार्टी (PAN) ने भी भारत के रुख का समर्थन किया। 29 मई 2025 को जकार्ता में भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात के दौरान PAN नेताओं ने कहा कि आतंकवाद को धर्म या जाति से जोड़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने भारत के पहलगाम हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भारत के साथ पूर्ण समर्थन की बात दोहराई।

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भारतीय प्रतिनिधिमंडल की पहल: वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण

जनता दल (यू) के सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 20 से अधिक मित्र देशों के राजनयिकों से मुलाकात की। इस दौरान सभी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया और भारत के रुख की सराहना की।

भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि इस संवाद के दौरान भारत ने अपनी आतंकवाद विरोधी नीति को साझा किया और इंडोनेशियाई नेताओं ने इसे सशक्त व ठोस बताया।

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