Aravalli Hills: अकावली पर्वत श्रृंखला पर एक बड़ी अपडेट सामने आई है। सरकार कह रही है कि अरावली का सिर्फ 0.2% हिस्सा खतरे में है? मगर असली आंकड़े इससे कहीं ज्यादा अलग और गंभीर हो सकते हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि अरावली का करीब 30% हिस्सा सीधे खतरे में है। VR अरावली’ ग्रुप ने सरकार को चेतावनी दी है। जियोलॉजिस्ट कह रहे है कि सरकार का दावा कि अरावली का सिर्फ 0.2% हिस्सा खतरे में है, पूरी तरह गलत है। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। अधिक और सटीक जानकारी के लिए इस लेख को अंत तक पढ़ना न भूले।
Aravalli Hills: जाने क्या कहते है रिपोर्ट्स
बात अगर जियोलॉजिस्ट के रिपोर्ट की करें तो, उनकी रिपोर्ट के अनुसार, 32% अरावली खतरे में है। ग्रुप का दावा है कि अगर 100 मीटर वाली नई परिभाषा लागू होती है, तो 2047 तक जयपुर शहर रेगिस्तान में बदल सकता है। साथ ही, पुष्कर जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल भी गंभीर खतरे में हैं। आपको बता दे कि नासा और इसरो के डेटा के अनुसार थार की रेतीली हवाएं धीरे-धीरे शहरों की ओर बढ़ रही हैं, जिससे पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
करोड़े के राजस्व के लिए प्रकृति से छेड़ छाड़ कितना उचित?
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ Aravalli Hills में होने वाले माइनिंग से होने वाले अरबों के राजस्व के लिए हम अपनी प्रकृति को खतरे में डाल सकते हैं? आपको बता दे कि राजस्थान में माइनिंग से करीब 11,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। मगर पर्यावरणीय नुकसान इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। और इसी बात को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अरावली की नई परिभाषा पर स्टे लगा दिया है और नई कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जो मामले की गहराई से जांच करेगी। जानकारी के लिए बता दे कि अब इस मामले में अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।

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