September 3, 2026

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Supreme Court: अशोक गहलोट से लेकर इन नेताओं ने अरावली के फैसले पर दिया बयान

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Supreme Court: अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत की खबर आई है। अरावली की नई परिभाषा को लेकर उठे विवाद पर Supreme Court ने अपने पुराने आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की दोबारा वैज्ञानिक समीक्षा का फैसला लिया है जिसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि अरावली की नई परिभाषा का विरोध पहले ही फॉरेस्ट सर्वे ऑप इंडिया, सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमीटी और यहां तक कि अदालत के एमिकस क्यूरी भी कर चुके थे।

Supreme Court: जाने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या है असर

इसके अलावा बात अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की करें तो, वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर जयराम रमेश ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जयराम रमेश ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश उम्मीद की एक किरण है, लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अरावली को खनन, रियल स्टेट और कॉरपोरेट हितों के हवाले करने की कोशिशों का लगातार विरोध करना होगा। वहीं राजस्थान में इस फैसले को जनता के आंदोलन की जीत बताया जा रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे पर्यावरण और जनभावनाओं की जीत करार दिया। आपको बता दे कि टीकाराम जूली ने कहा कि “अरावली राजस्थान की पहचान और सुरक्षा की ढाल है। बीजेपी सरकार में माइनिंग माफिया इसे मिट्टी में मिलाना चाहता है। हमारे लिए अरावली पहाड़ नहीं, माँ है, और माँ अरावली को बेचने वालों को राजस्थान कभी माफ नहीं करेगा।”

अशोक गहलोट ने दी ये प्रतिक्रिया

आपको बता दे कि पर्यावरण कार्यकर्ता नीलम आहूवालिया के नेतृत्व में देशभर के पर्यावरणकर्ताओं ने कोर्ट द्वारा दी गई नई परिभाषा को अवैज्ञानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में आवाज़ उठाई थी। उनका कहना है कि ऊँचाई के आधार पर अरावली की पहचान करने से इसके बड़े हिस्से खनन और निर्माण के लिए खोल दिए जाते। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह फैसला जनता की ताकत का नतीजा है। “ये आंदोलन राजनीति से ऊपर था। छात्रों, युवाओं, आम नागरिकों और विशेषज्ञों की एकजुट आवाज़ ने सुप्रीम कोर्ट को फिर से संज्ञान लेने पर मजबूर किया।”

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