मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026: 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में भारत को सिल्वर, रचा इतिहास
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026 में आखिरकार अपने नाम का पहला पदक दर्ज कराने में सफल रही हैं। मणिपुर की 32 वर्षीय अनुभवी वेटलिफ्टर ने बुधवार को महिलाओं की 49 किलो कैटेगरी में रजत पदक जीता। ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीत चुकीं मीराबाई के एशियन गेम्स करियर में अब तक कोई मेडल नहीं था। इस बार सिल्वर जीतकर उन्होंने एशियाई खेलों में पदक का सूखा खत्म कर दिया।
28 साल बाद भारत को वेटलिफ्टिंग में सिल्वर
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर जीतकर 28 साल बाद एशियन गेम्स की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाली भारतीय बनीं। उनसे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने 1998 के बैंकॉक एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। मीराबाई ने प्रतियोगिता में कुल 198 किलो वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 87 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो वजन उठाया। इस प्रदर्शन के साथ उनका एशियन गेम्स का पहला पदक भी उनके नाम हो गया।
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026: सॉन्ग गम ने जीता गोल्ड
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल से चूक गईं, जबकि नॉर्थ कोरिया की सॉन्ग गम ने 215 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सॉन्ग गम ने स्नैच में 94 किलो और क्लीन एंड जर्क में 121 किलो वजन उठाया। उनके दोनों प्रदर्शन में विश्व रिकॉर्ड दर्ज हुआ। यह सॉन्ग गम का लगातार तीसरा एशियन गेम्स गोल्ड मेडल भी रहा। वहीं मीराबाई ने सिल्वर के साथ अपने एशियन गेम्स करियर में नया अध्याय जोड़ा।
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026: पिछली बार चोट ने रोका था पोडियम
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026 से पहले उनका एशियन गेम्स रिकॉर्ड पदक के लिहाज से खाली था। 2014 के एशियन गेम्स में वह नौवें स्थान पर रही थीं। 2028 के जकार्ता खेलों में वह पीठ की चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकीं। वहीं 2023 के हांगझोऊ गेम्स में वह पोडियम फिनिश के बेहद करीब पहुंची थीं, लेकिन इंजरी के चलते चौथे स्थान पर रहीं। अब सिल्वर मेडल के साथ वह ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स तीनों बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स में पदक जीत चुकी हैं।
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026: कैसे तय होता है वेटलिफ्टिंग का विजेता
मीराबाई चानू एशियन गेम्स 2026 के प्रदर्शन को समझने के लिए वेटलिफ्टिंग के स्कोरिंग सिस्टम को जानना जरूरी है। इस खेल में स्नैच और क्लीन एंड जर्क दो अलग विधाएं होती हैं। दोनों में खिलाड़ियों को तीन-तीन कोशिशें मिलती हैं और हर कैटेगरी की सबसे अच्छी वैलिड कोशिश को स्कोर में शामिल किया जाता है। दोनों कैटेगरी का कुल स्कोर मिलाकर रैंकिंग तय होती है। किसी एक इवेंट में तीनों कोशिशें फाउल होने पर खिलाड़ी डिस्क्वालीफाई हो जाता है। सबसे ज्यादा कुल वजन उठाने वाला एथलीट गोल्ड मेडल जीतता है।
