January 13, 2026

विवाह पंजीकरण को लेकर बदली सोच, UCC के बाद उत्तराखंड में 24 गुना वृद्धि

देहरादून: समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद उत्तराखंड में इसके प्रभाव साफ तौर पर दिखने लगे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) को लेकर जागरूकता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यूसीसी लागू होने के बाद प्रतिदिन औसतन होने वाले विवाह पंजीकरण की संख्या में 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि 27 जनवरी 2025 को यूसीसी लागू होने के बाद से लेकर जुलाई 2025 तक, यानी केवल पहली छमाही में ही तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हो चुके हैं। यह संख्या पुराने कानून की तुलना में कई गुना अधिक है।इसके उलट, उत्तराखंड अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2010 के तहत वर्ष 2010 से 2025 के बीच पूरे 15 वर्षों में कुल 3,30,064 विवाह ही पंजीकृत हुए थे। यानी जितने विवाह 15 साल में दर्ज हुए, लगभग उतने ही पंजीकरण यूसीसी लागू होने के कुछ ही महीनों में हो गए।

देश का पहला UCC लागू करने वाला राज्य

विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू किया। सरकार के अनुसार, इस कानून के लागू होने के बाद आम जनता में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है।मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान यूसीसी लागू करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद, मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही इस पर निर्णय लिया गया। सभी कानूनी प्रक्रियाओं और व्यापक जनमत संग्रह के बाद 27 जनवरी 2025 से राज्य में यूसीसी कानून लागू कर दिया गया।

सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में कदम

सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री का यह फैसला सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम है। यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को—विशेष रूप से महिलाओं को—समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है।यूसीसी के तहत

  • विवाह, तलाक, उत्तराधिकार
  • सहवासी संबंध (Live-in Relationship)
  • और उनसे जुड़े कानूनी प्रावधानों को शामिल किया गया है

इसके अलावा, महिला और पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है और सभी धर्मों में तलाक व अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान और सख्त नियम लागू किए गए हैं

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