नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अहम खुलासे करते हुए बताया कि आखिर पाकिस्तान अचानक सीजफायर के लिए क्यों मजबूर हो गया था। उन्होंने कहा कि जब थल सेना, नौसेना और वायुसेना को मूवमेंट के निर्देश मिल गए थे, तब पाकिस्तान ने हालात की गंभीरता को समझते हुए खुद ही सारे संकेत जोड़ लिए थे।जनरल द्विवेदी के मुताबिक, 10 मई की सुबह भारत की तीनों सेनाओं को एक साथ मूवमेंट के आदेश मिल चुके थे। पाकिस्तान को यह साफ नजर आने लगा था कि भारत किसी बड़े सैन्य कदम की तैयारी कर चुका है।
पाकिस्तान ने डॉट्स जोड़ लिए थे”
सेना प्रमुख ने कहा 10 मई की सुबह हमें तीनों सेनाओं को मूवमेंट के निर्देश मिल गए थे और पाकिस्तान ने ये डॉट्स जोड़ लिए थे। उन्हें समझ आ गया था कि कहां से शिप, कहां से वॉरशिप, कहां से एयरक्राफ्ट और कहां से ग्राउंड मूवमेंट हो रही है। इमेजरी के जरिए उन्हें सब दिख गया था। यही वह टर्निंग प्वाइंट था, जिसके बाद पाकिस्तान ने सीजफायर का रास्ता चुना।”
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि भारत की सैन्य तैयारियां इतनी स्पष्ट और व्यापक थीं कि पाकिस्तान को यह अंदाजा हो गया था कि यदि उसने कोई गलती की, तो भारत जमीनी ऑपरेशन (Ground Offensive) शुरू करने में देर नहीं लगाएगा।
न्यूक्लियर बयानबाजी पर बड़ा खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान न्यूक्लियर धमकियों को लेकर पूछे गए सवाल पर सेना प्रमुख ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि DGMO (Director General of Military Operations) स्तर की बातचीत में किसी भी तरह की न्यूक्लियर चर्चा नहीं हुई।जनरल द्विवेदी ने कहा जहां तक न्यूक्लियर बयानबाजी की बात है, DGMO बातचीत के दौरान इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। जो भी न्यूक्लियर बयान सामने आए, वे पाकिस्तान के नेताओं या वहां की जनता की ओर से थे। मुझे ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि पाकिस्तानी सेना की तरफ से आधिकारिक तौर पर ऐसा कुछ कहा गया हो।”यह बयान पाकिस्तान की ओर से बार-बार की जाने वाली न्यूक्लियर धमकियों को राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति के रूप में उजागर करता है।
88 घंटे जब भारत ग्राउंड ऑपरेशन के लिए तैयार था
सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 88 घंटे बेहद निर्णायक थे। इस अवधि में भारतीय सेना की तैनाती इस तरह की गई थी कि यदि पाकिस्तान कोई भी सैन्य दुस्साहस करता, तो भारत तुरंत जमीनी कार्रवाई शुरू कर सकता था।उन्होंने कहा उन 88 घंटों में आपने देखा कि पारंपरिक स्पेस को बढ़ाने के लिए हमारी तैनाती ऐसी थी कि पाकिस्तान अगर कोई गलती करता, तो हम पूरी तरह तैयार थे।
आतंकवाद पर करारा प्रहार
सेना प्रमुख ने आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों को लेकर भी अहम आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि:
- 2025 में अब तक 31 आतंकवादी मारे गए
- इनमें से 65 प्रतिशत आतंकी पाकिस्तानी मूल के थे
- पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकियों को ऑपरेशन महादेव में मार गिराया गया
- जम्मू-कश्मीर में अब सक्रिय स्थानीय आतंकवादी सिंगल डिजिट में रह गए हैं
यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने आतंक के नेटवर्क को लगभग तोड़ दिया है।ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि भारत अब सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं करता, बल्कि पूरी रणनीतिक तैयारी के साथ दबाव बनाता है। तीनों सेनाओं की संयुक्त मूवमेंट, सटीक इंटेलिजेंस और स्पष्ट सैन्य संकेतों ने पाकिस्तान को यह समझा दिया कि आगे बढ़ने का मतलब भारी नुकसान होगा।जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयानों से यह भी साफ है कि भारत की नीति न्यूक्लियर डर की राजनीति से प्रभावित होने वाली नहीं है। आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों पर भारत की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और निर्णायक हो चुकी है।

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