मंदिर के पास छत पर चढ़ी नीलगाय
उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में शुक्रवार को एक दिलचस्प और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। मोहल्ला महाजनान के राधाकृष्ण बड़ा मंदिर के पास स्थित पंडित रामनिवास शर्मा के घर की छत पर एक नीलगाय किसी तरह चढ़ गई। दोपहर के समय लोगों ने ऊपर खड़ी इस विशाल नीलगाय को देखा तो आश्चर्यचकित रह गए। तुरंत वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया, जो कुछ ही देर में वायरल हो गया। नीलगाय नीचे उतरने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण और स्थानीय लोग जमा हो गए। यह घटना न केवल जानवरों की अप्रत्याशित हरकतों को दर्शाती है, बल्कि समुदाय की एकजुटता का भी उदाहरण बनी। मुरादनगर जैसे छोटे शहरों में ऐसी घटनाएं आम हैं, लेकिन इस बार सबकी नजरें नीलगाय पर टिक गईं।
चार घंटे की मशक्कत: रस्सी-जाल से सुरक्षित बचाव
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, गौ रक्षा दल के जिला अध्यक्ष गुलशन राजपूत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत वन विभाग और पुलिस प्रशासन को सूचना दी। संयुक्त अभियान शुरू हुआ, जिसमें रस्सियां, जाल और सावधानीपूर्वक योजना शामिल थी। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नीलगाय को बिना किसी नुकसान के छत से नीचे उतार लिया गया। इस दौरान यश शर्मा, राहुल कर्ण, राजकुमार शर्मा सहित कई गौ रक्षक और वनकर्मी मौजूद रहे। गुलशन राजपूत ने बताया, “नीलगाय जंगली जानवर होते हुए भी शांत रही। हमारी प्राथमिकता था कि उसे चोट न पहुंचे।” वन विभाग ने बाद में नीलगाय की जांच की और उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ा। यह ऑपरेशन समुदाय की सतर्कता और संगठित प्रयासों का प्रतीक बना, जो जानवरों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है।
शांत नीलगाय: मोहल्ले की ‘परिवार’ सदस्य
सबसे रोचक बात यह रही कि नीलगाय ने पूरे ड्रामे के दौरान कोई उत्पात नहीं मचाया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह नीलगाय पास में रहने वाले अर्जुन त्यागी की पालतू थी। अर्जुन के निधन के बाद यह मोहल्ले में ही घूमती रहती है। आस-पास के लोग इसे खाना-पानी देते हैं, इसलिए यह सबको पहचानती है। इसी वजह से यह शांत रही और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। मोहल्ले वाले इसे ‘परिवार का सदस्य’ मानते हैं। एक निवासी ने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि इसे देखभाल दें।” नीलगायें अक्सर फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं, लेकिन यहां की यह कहानी सकारात्मक है। गौ रक्षा दल ने भी सराहना की कि जानवर की शांति ने बचाव को आसान बनाया। यह घटना पशु-मानव सह-अस्तित्व की मिसाल है।
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गौ रक्षा दल की सराहना: समुदाय की एकजुटता
पूरी घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने गौ रक्षा दल, वन विभाग और पुलिस की जमकर तारीफ की। गुलशन राजपूत ने कहा, “हम गौवंश की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, चाहे वह गाय हो या नीलगाय।” टीम के सदस्यों ने जोखिम भरे अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह प्रयास उत्तर प्रदेश में बढ़ते वन्यजीव मानव संघर्ष को संभालने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। सोशल मीडिया पर वीडियो को हजारों व्यूज मिले, जहां लोग बचाव टीम की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में जागरूकता और त्वरित कार्रवाई जरूरी है। मुरादनगर प्रशासन ने भी भविष्य में ऐसी स्थितियों के लिए दिशानिर्देश जारी करने का वादा किया। यह घटना न केवल मनोरंजक है, बल्कि पशु संरक्षण की प्रेरणा भी देती है।
सबक और आगे की राह: पशु संरक्षण में जागरूकता
मुरादनगर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जंगली जानवर कभी भी अप्रत्याशित हरकत कर सकते हैं। नीलगायें भारत में संरक्षित हैं, लेकिन शहरीकरण से उनका मानव संपर्क बढ़ रहा है। गौ रक्षा दल जैसे संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जरूरत है स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान, शेल्टर होम और वन्यजीव हेल्पलाइन की। समुदाय ने दिखाया कि एकजुट होकर कोई भी चुनौती हल की जा सकती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए फेंसिंग और ट्रेनिंग जरूरी। यह अनोखा नजारा न केवल हंसी का विषय बना, बल्कि संवेदनशीलता का संदेश भी। क्या आपने कभी ऐसी मजेदार जानवरों की कहानी सुनी? साझा करें कमेंट्स में!

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