January 27, 2026
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America: NATO चीफ का खुला दावा — यूरोप की सुरक्षा आज भी America पर निर्भर

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यूरोप की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच NATO के महासचिव मार्क रुटे ने यूरोपीय संघ (EU) के सांसदों के सामने बेहद साफ और कठोर संदेश दिया है। रुटे ने दो टूक शब्दों में कहा कि America के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता, और जो लोग यह सोचते हैं कि यूरोप अकेले अपने दम पर सुरक्षित रह सकता है, वे हकीकत नहीं बल्कि “सपनों की दुनिया” में जी रहे हैं। रुटे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब NATO के भीतर America और यूरोप के रिश्तों को लेकर असहजता बढ़ रही है और कई यूरोपीय देशों में “रणनीतिक आत्मनिर्भरता” को लेकर बहस तेज हो गई है।

Europe–America साझेदारी पर टिकी NATO की ताकत

ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए NATO चीफ ने कहा,“अगर किसी को लगता है कि यूरोप America के बिना खुद को बचा सकता है, तो वह सपना ही देखता रहे। यह मुमकिन नहीं है।”रुटे ने साफ किया कि यूरोप और America की सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। NATO की पूरी संरचना, उसकी सैन्य क्षमता और उसकी वैश्विक विश्वसनीयता इसी ट्रांस-अटलांटिक साझेदारी पर आधारित है।उनके मुताबिक, America सिर्फ NATO का एक सदस्य नहीं, बल्कि उसकी रीढ़ है — चाहे बात अत्याधुनिक हथियारों की हो, खुफिया सूचनाओं की हो या परमाणु सुरक्षा गारंटी की।

NATO में बढ़ता तनाव और America की भूमिका

हाल के हफ्तों में NATO के भीतर तनाव और मतभेद खुलकर सामने आए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह America के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान रहे हैं। ट्रंप ने डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को America के नियंत्रण में लेने की बात कहकर यूरोप को चौंका दिया था। इसके बाद उन्होंने ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों पर नए व्यापारिक टैरिफ लगाने की धमकी भी दी। हालांकि, बाद में एक शुरुआती समझौते के बाद इन टैरिफ योजनाओं को रोक दिया गया। इस पूरे कूटनीतिक तनाव के दौरान NATO महासचिव मार्क रुटे की मध्यस्थ भूमिका अहम मानी जा रही है, जिन्होंने America और यूरोपीय सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।

Article 5: NATO की सुरक्षा गारंटी, जिसमें America सबसे अहम

NATO को दुनिया का सबसे ताकतवर सैन्य गठबंधन बनाने वाला सबसे अहम प्रावधान है — Article 5। इसके तहत अगर NATO के 32 सदस्य देशों में से किसी एक पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। ऐसे में सभी देश उस सदस्य की रक्षा के लिए सैन्य और रणनीतिक मदद देने को बाध्य होते हैं। यही सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा NATO की असली ताकत है — और इस सिस्टम में America की भूमिका सबसे निर्णायक मानी जाती है।

रक्षा खर्च बढ़ाने पर सहमति, America के दबाव का असर

जुलाई में हेग में हुए NATO शिखर सम्मेलन में यूरोपीय देशों और कनाडा ने America के दबाव में रक्षा खर्च बढ़ाने पर सहमति जताई।हालांकि इस फैसले से स्पेन ने खुद को अलग रखा। स्पेन को छोड़कर NATO के बाकी सभी सदस्य देशों ने अगले 10 वर्षों में अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का वादा किया है, ताकि America पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सके।

2035 तक रक्षा पर GDP का 5%, लेकिन क्या यह America के बिना काफी है?

NATO देशों ने तय किया है कि वे वर्ष 2035 तक:

  • 3.5% GDP सीधे रक्षा खर्च पर
  • 1.5% GDP सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं (जैसे साइबर सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स) पर

खर्च करेंगे। इस तरह कुल मिलाकर GDP का 5% हिस्सा रक्षा और सुरक्षा के लिए तय किया गया है, लेकिन रुटे के मुताबिक यह भी America के बिना पर्याप्त नहीं है।

“America के बिना चलना है तो 10% खर्च करना होगा” — रुटे

मार्क रुटे ने यूरोप को चेताते हुए कहा कि अगर वह सच में America के बिना आगे बढ़ना चाहता है, तो 5% खर्च भी नाकाफी होगा। उनके शब्दों में, “अगर आप अकेले चलना चाहते हैं, तो आपको GDP का 10% रक्षा पर खर्च करना होगा। इसके साथ ही आपको अपनी खुद की परमाणु क्षमता भी बनानी होगी, जिस पर अरबों यूरो खर्च होंगे।” रुटे का साफ संकेत था कि America के बिना सुरक्षा न तो आसान है और न ही सस्ती।

परमाणु छतरी के बिना यूरोप कितना सुरक्षित?

NATO चीफ ने कहा कि America के बिना यूरोप अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी खो देगा — America की परमाणु सुरक्षा छतरी। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा, “अगर America नहीं हुआ, तो हमारी आज़ादी की आखिरी गारंटी भी चली जाएगी। फिर… गुड लक।” इस बयान के जरिए रुटे ने यह साफ कर दिया कि यूरोप की स्वतंत्रता और सुरक्षा आज भी काफी हद तक America की सैन्य और परमाणु ताकत पर निर्भर है।

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