August 27, 2026

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अमित शाह बोले: अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द होगी शर्म, भाषाई आत्मसम्मान जरूरी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर देश की भाषाई पहचान को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने गुरुवार को एक पुस्तक विमोचन समारोह में कहा कि भारत को अपनी भाषाई विरासत पर गर्व करना चाहिए, न कि विदेशी भाषा अंग्रेजी पर निर्भर रहना चाहिए। शाह का यह बयान उस समय आया है जब देश में नई शिक्षा नीति (NEP) और त्रिभाषा फार्मूले को लेकर कई राज्यों में विरोध देखा जा रहा है।

“जल्द शर्म आएगी अंग्रेजी बोलने वालों को”

अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह समय दूर नहीं जब भारत में अंग्रेजी बोलने वाले लोग खुद को लेकर शर्म महसूस करेंगे। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म को विदेशी भाषा में नहीं समझ सकता। भारत की आत्मा उसकी देशी भाषाओं में ही बसती है।” शाह ने अंग्रेजी को औपनिवेशिक गुलामी का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मानसिक गुलामी से बाहर निकलने का समय है।

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देशी भाषाएं: भारत की असली पहचान

गृह मंत्री का मानना है कि भारतीय भाषाएं न केवल संवाद का माध्यम हैं, बल्कि वे संस्कृति, परंपरा और मूल्यबोध की वाहक भी हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा में शिक्षा या संवाद से व्यक्ति अपने मूल से कट जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा में शिक्षित किया जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय सोच और संस्कारों को आत्मसात कर सकें।

शिक्षा नीति और ‘हिंदी थोपने’ का विवाद

शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फार्मूले को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों और विपक्षी दलों में असंतोष व्याप्त है। इन दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार हिंदी को थोप रही है। हालांकि, केंद्र का कहना है कि यह नीति देश की विविधता को ध्यान में रखकर बनाई गई है और इसका उद्देश्य मातृभाषा को प्राथमिकता देना है, न कि कोई एक भाषा थोपना।

“भारत को अपनी भाषाओं में चलाना होगा”

शाह ने अपने भाषण में यह भी कहा कि एक आत्मनिर्भर, आत्मगौरव से भरा हुआ भारत तभी बन सकता है जब वह अपनी भाषाओं में सोचने, समझने और निर्णय लेने लगे। उन्होंने जोर दिया कि भारत को अपनी भाषाओं में ही चलाना होगा और दुनिया का नेतृत्व भी इसी आत्मविश्वास से किया जा सकता है।

भाषाई एकता, वैविध्य और आत्मसम्मान

अंत में शाह ने कहा कि यह लड़ाई कठिन जरूर है, लेकिन भारतीय समाज इसे जीतने में सक्षम है। उन्होंने देशवासियों से अपनी भाषाओं के प्रति सम्मान और गर्व की भावना अपनाने की अपील की। उनके अनुसार, भाषाई विविधता ही भारत की शक्ति है और इसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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