बेंगलुरु आधारित ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी मजबूती का प्रमाण दिया है। स्कूटर और मोटरसाइकल की बिक्री में उतार-चढ़ाव और सर्विसिंग सिस्टम की आलोचनाओं के बावजूद, कंपनी का ऑटो बिजनेस जुलाई-सितंबर 2025 (Q2 FY26) में पहली बार मुनाफे में आ गया। कंपनी ने कर-पूर्व आय (EBITDA) में 0.3 फीसदी की पॉजिटिव ग्रोथ दर्ज की, जो Q1 FY26 के 5.3 फीसदी के नुकसान से उल्लेखनीय सुधार है। यह उपलब्धि कंपनी के लिए बड़ा माइलस्टोन है, खासकर जब EV बाजार में प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही है। ओला ने कहा कि यह सुधार न्यूनतम PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) का 2 फीसदी लाभ लेकर आया, जो ICE (इंटरनल कॉम्बस्शन इंजन) दोपहिया कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है। कुल डिलीवरी 52,666 यूनिट रही, जो बाजार की मंदी के बावजूद स्थिरता दिखाती है।
ग्रॉस मार्जिन में उछाल: 30.7 फीसदी तक पहुंचा, ICE से बेहतर
ओला इलेक्ट्रिक के वित्तीय परिणामों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। Q2 FY26 में मोटर वाहन ग्रॉस मार्जिन 510 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 30.7 फीसदी हो गया, जो कई पारंपरिक ICE दोपहिया निर्माताओं से आगे है। यह वृद्धि लागत नियंत्रण और कुशल उत्पादन का नतीजा है। कंपनी ने बताया कि ऑपरेटिंग इनकम 690 करोड़ रुपये रही, जो YoY 43 फीसदी घटी लेकिन QoQ स्थिर रही। ऑपरेटिंग एक्सपेंडीचर सालाना 308 करोड़ से घटकर 258 करोड़ रुपये हो गया, जबकि इंटिग्रेटेड ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज 451 करोड़ से कम होकर 416 करोड़ रुपये पर आ गया। ये आंकड़े कंपनी की लागत-कटौती रणनीति की सफलता को रेखांकित करते हैं। हालांकि, कंसोलिडेटेड नेट लॉस 418 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 495 करोड़ से संकुचित है। ओला का एवरेज सेलिंग प्राइस 1.31 लाख रुपये प्रति यूनिट पहुंच गया, जिसमें 75 फीसदी मास सेगमेंट और 25 फीसदी प्रीमियम सेल्स शामिल हैं।
टेक्नॉलजी और ऑपरेशनल सुधार: लागत घटाने पर फोकस
कंपनी ने परिचालन को सुव्यवस्थित करने पर जोर दिया है। ओला को उम्मीद है कि FY27 की पहली तिमाही तक मोटर वाहन ऑपरेटिंग व्यय 225 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इंटिग्रेटेड ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज को 350-375 करोड़ रुपये के दायरे में रखने का लक्ष्य है। टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता बढ़ रही है – जनवरी 2026 तक 5.9 GWh और H2 FY27 तक 20 GWh तक पहुंचने का प्लान। भारत का पहला फेराइट मोटर सर्टिफाइड हो चुका है, जो रेयर-अर्थ इंपोर्ट पर निर्भरता कम करेगा। इसके अलावा, ओला शक्ति – एक रेसिडेंशियल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम – लॉन्च किया गया, जो भारत 4680 सेल्स पर आधारित है। सेल बिजनेस Q4 से रेवेन्यू योगदान देगा, जिसमें ग्रॉस मार्जिन 30 फीसदी तक स्थिर होगा। ये कदम EV इकोसिस्टम में ओला को मजबूत बनाएंगे।
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भविष्य की योजनाएं: H2 FY26 में 100,000 डिलीवरी और 40% मार्जिन
ओला इलेक्ट्रिक का आउटलुक सकारात्मक है। H2 FY26 में कुल 100,000 यूनिट डिलीवरी का टारगेट है, जबकि कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 3,000-3,200 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद। ऑटो सेगमेंट Q4 तक ग्रॉस मार्जिन 40 फीसदी और EBITDA 5 फीसदी तक पहुंचाएगा। कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस कर रही है, वॉल्यूम ग्रोथ से ज्यादा। जनवरी 2026 तक सभी वाहनों में इन-हाउस सेल्स का ट्रांजिशन होगा। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एनर्जी स्टोरेज मार्केट में Q1 FY27 एंट्री की योजना, 100 kWh से 5 MWh सिस्टम्स के साथ। हालांकि, ऑडिटर ने FY25 में इन्वेंटरी वेरिफिकेशन में कमजोरी की ओर इशारा किया, जिसे सुधारने की जरूरत है। ये पहल ओला को TVS, बजाज और एथर से आगे रखेंगी।
बाजार प्रभाव और चुनौतियां: निवेशकों की नजर बेंगलुरु पर
Q2 रिजल्ट्स के बाद ओला का शेयर 49.80 रुपये पर ट्रेड कर रहा, मामूली गिरावट के साथ। यह माइलस्टोन EV सेक्टर में विश्वास जगाता है, लेकिन सर्विसिंग इश्यूज और डिमांड स्लोडाउन चुनौतियां बनी हुई हैं। ओला का फोकस टेक्नॉलजी और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन से बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर है। सेल बिजनेस FY27 तक 30 फीसदी मार्जिन देगा। निवेशक अब H2 परफॉर्मेंस पर नजर रखेंगे। यह तिमाही साबित करती है कि चुनौतियों के बावजूद ओला इलेक्ट्रिक का भविष्य उज्ज्वल है – क्या यह EV क्रांति का नया अध्याय लिखेगी?

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