देश ने एक और वीर सपूत खो दिया — कैप्टन सुमित सभरवाल, एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के वरिष्ठ पायलट, जिन्होंने अपनी अंतिम उड़ान में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए शहादत दी। यह हादसा न केवल एक विमान दुर्घटना था, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक भावनात्मक आघात बन गया। 275 से अधिक जानें इस दुखद त्रासदी में चली गईं, और उनमें से एक ऐसा नाम था जिसने जीवन भर उड़ान को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि देश सेवा का माध्यम माना — कैप्टन सुमित सभरवाल।
30 वर्षों का अनुभव और 8000+ घंटे की उड़ान
कैप्टन सुमित का करियर एक मिसाल है। तीन दशकों तक उन्होंने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय आकाश को सुरक्षित और अनुशासित उड़ानों से भर दिया। उनके साथी उन्हें एक ऐसे पायलट के रूप में याद करते हैं जो हर बार उड़ान से पहले सुरक्षा जांच को व्यक्तिगत रूप से गंभीरता से लेते थे। वे कहते हैं कि “अगर कभी किसी को मुश्किल में पायलट चुनना होता, तो सुमीत सर का नाम सबसे ऊपर होता।”
एक पिता, एक आदर्श, एक इंसान
कैप्टन सुमित सिर्फ एक पायलट नहीं थे, वो एक बेटे, पिता, पति और दोस्त भी थे। उनके पिता, जो अब उनके पार्थिव शरीर के आगे मौन बैठे हैं, अक्सर कहा करते थे कि अब बेटा रिटायर होकर परिवार के साथ समय बिताए। लेकिन देश सेवा का जुनून, ज़िम्मेदारी की भावना और उड़ान के प्रति समर्पण ऐसा था कि कैप्टन सुमीत ने अपने अंतिम क्षण तक कर्तव्य नहीं छोड़ा।
मानवता की मिसाल
उनका व्यक्तित्व जितना अनुशासित था, उतना ही मानवीय भी। साथी कर्मचारी और क्रू मेंबर्स उन्हें एक बेहद विनम्र और प्रेरणादायक व्यक्ति के रूप में याद करते हैं, जो हमेशा सहयोग और सहानुभूति से पेश आते थे। उन्होंने कई मौकों पर अपने यात्रियों के लिए व्यक्तिगत रूप से पहल की — चाहे वह मेडिकल इमरजेंसी हो या यात्रियों की सुविधा।
एक राष्ट्र की क्षति
उनकी मृत्यु केवल एक परिवार के लिए शोक की बात नहीं है, यह पूरे देश की क्षति है। ऐसे नायक रोज़ पैदा नहीं होते। उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि विमान के अंदर बैठकर जो सुरक्षा हम महसूस करते हैं, उसके पीछे एक ऐसे कंधे होते हैं जो हर जोखिम को खुद पर लेकर हमें गंतव्य तक पहुंचाते हैं।
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