September 3, 2026

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Chabahar Port: भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया कनेक्टिविटी का रणनीतिक केंद्र

Chabahar Port

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Chabahar Port: भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया कनेक्टिविटी का रणनीतिक केंद्रभारत और ईरान के बीच स्थित चाबहार पोर्ट दक्षिण एशिया में एक अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना माना जाता है। यह प्रोजेक्ट भारत की विदेश नीति, क्षेत्रीय कूटनीति, व्यापार और कनेक्टिविटी के लिहाज़ से एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

पाकिस्तान को बाईपास करने वाला वैकल्पिक मार्ग

चाबहार पोर्ट का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह पाकिस्तान को पूरी तरह बाईपास करते हुए भारत को अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधे समुद्री और जमीनी मार्ग से जोड़ता है। पाकिस्तान द्वारा भारत को इन देशों तक ज़मीनी रास्ता देने से इनकार किए जाने के बाद, Chabahar Port भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया कनेक्टिविटी का रणनीतिक केंद्र भारत के लिए एक भरोसेमंद और रणनीतिक विकल्प बनकर उभरा है।

INSTC का अहम हिस्सा, समय और लागत में बड़ी बचत

यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत को ईरान, रूस और आगे यूरोप से जोड़ता है। इस कॉरिडोर के ज़रिए व्यापारिक समय में करीब 15 दिनों तक की कमी आ सकती है, जबकि लॉजिस्टिक लागत में लगभग 30 प्रतिशत तक की कटौती संभव मानी जा रही है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलती है।

मानवीय सहायता का भी बना अहम केंद्र

Chabahar Port भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया कनेक्टिविटी का रणनीतिक केंद्र केवल एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि मानवीय सहायता का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर सामने आया है। तालिबान शासन के दौरान भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को राहत सामग्री, खाद्यान्न और दवाइयाँ इसी पोर्ट के ज़रिए भेजीं, जिससे भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच संपर्क और संबंध बनाए रखने में मदद मिली।

अब तक 500 मिलियन डॉलर की भारतीय प्रतिबद्धता

भारत अब तक इस परियोजना में कुल लगभग 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपये) की वित्तीय प्रतिबद्धता जता चुका है। इसमें से लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश पूरा हो चुका है, जिसका उपयोग हार्बर क्रेन, कार्गो हैंडलिंग उपकरण और पोर्ट के आधुनिकीकरण में किया गया है।

Chabahar Port: भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया कनेक्टिविटी का रणनीतिक केंद्र10 साल का ऑपरेशन समझौता, आगे और निवेश

साल 2024 में भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट को लेकर 10 वर्षों के ऑपरेशन समझौते पर सहमति बनी। इस समझौते के तहत भारत आने वाले वर्षों में 370 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश कर पोर्ट की क्षमता विस्तार और संचालन को और मजबूत करेगा। भारत की कूटनीति और व्यापार रणनीति का अहम स्तंभकुल मिलाकर, चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट सिर्फ एक आर्थिक पहल नहीं है, बल्कि यह भारत की क्षेत्रीय कूटनीति, व्यापार रणनीति और मध्य एशिया तक पहुँच को सुदृढ़ करने वाला एक अहम स्तंभ बन चुका है।

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