February 12, 2026

वोट के नाम पर क्रूरता! तेलंगाना में 500 आवारा कुत्तों की निर्मम हत्या, लोगों में आक्रोश

तेलंगाना के कामारेड्डी जिले से इंसानी क्रूरता की एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। माचेरेड्डी मंडल के फरीदपेट, भवानीपेट, वाडी और पलवंचा गांवों में बीते कुछ दिनों में करीब 500 से 600 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर जहर देकर मार दिया गया।पशु संरक्षण संस्था ‘गौतम स्ट्रे एनिमल्स फाउंडेशन’ ने इस घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या हुआ था गांवों में?

जानकारी के अनुसार, इन गांवों में अचानक बड़ी संख्या में कुत्तों के शव मिलने लगे। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाल ही में चुने गए सरपंचों ने चुनाव के दौरान आवारा कुत्तों की समस्या खत्म करने का वादा किया था।हालांकि, आरोप है कि इसके लिए उन्होंने ग़लत और क्रूर तरीका अपनाया।

  • कुत्तों के खाने में जहर मिलाया गया
  • या उन्हें जहरीले इंजेक्शन दिए गए
  • बाद में शवों को छिपाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई
  • स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों के अनुसार यह एक संगठित योजना थी।

पुलिस कार्रवाई और FIR

पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद सरपंचों और उनके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया है।जांच के दौरान यह पाया गया कि इस घटना में जानबूझकर और व्यापक रूप से कुत्तों की हत्या की गई। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जांच जारी है और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि आवारा कुत्तों की हत्या की कोई सरकारी या न्यायिक अनुमति नहीं है।कोर्ट ने कहा है कि पशु जन्म नियंत्रण नियमों के तहत ही समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत इस तरह की हत्या अपराध है।सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य या स्थानीय निकाय को आवारा कुत्तों को मारने का अधिकार नहीं है।

कानूनी पहलू और भविष्य की कार्रवाई

  • इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है और पुलिस जांच जारी है।
  • आरोपियों के खिलाफ IPC की धाराओं और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
  • पशु अधिकार संगठनों ने मामले की न्यायिक समीक्षा और निगरानी की मांग की है।
  • स्थानीय प्रशासन को आवारा कुत्तों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित नीति बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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