August 20, 2026

Delimitation: परिसीमन पर घमासान, कर्नाटक ने 25 साल तक 543 लोकसभा सीटें बरकरार रखने की मांग

Delimitation

Delimitation

Delimitation: दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में परिसीमन का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। बैठक में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रस्ताव पारित करने की मांग की कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बरकरार रखी जाए। इसी तरह तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना की ओर से भी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की मांग उठाई गई। दक्षिणी राज्यों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए।

डीके शिवकुमार ने रखी कर्नाटक की कई मांगें

कर्नाटक के डीके शिवकुमार ने बैठक में वित्तीय हिस्सेदारी, केंद्रीय अनुदान, जल बंटवारे, महिला आरक्षण, बुनियादी ढांचे और किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता है। राज्य देश की करीब 5.5 फीसदी आबादी के साथ GDP में लगभग 9 फीसदी योगदान देता है। इसके अलावा भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में कर्नाटक की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी बताई गई। शिवकुमार ने कहा कि राज्य में करीब 1,100 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं और बेंगलुरु दुनिया के प्रमुख AI शहरों में शामिल है।

वित्तीय हिस्सेदारी और विशेष पैकेज की मांग

डीके शिवकुमार ने विभाज्य कर पूल में कर्नाटक की हिस्सेदारी 3.6 फीसदी से बढ़ाकर 4.7 फीसदी करने की मांग रखी। उन्होंने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग के तहत हिस्सेदारी घटने से छह वर्षों में राज्य को अनुमानित 65 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने विशेष और राज्य-विशिष्ट अनुदान जारी करने की मांग भी की। इसके अलावा बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल, STRR South, रायचूर में AIIMS और कल्याण कर्नाटक के लिए विशेष पैकेज में केंद्र से सहयोग की मांग उठाई गई।

जल बंटवारे और महिला आरक्षण का मुद्दा भी उठा

शिवकुमार ने कहा कि 1971 की जनसंख्या को आधार मानने वाली परिसीमन व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने जनगणना का इंतजार किए बिना महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। जल विवादों पर उन्होंने कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार और पालार नदी घाटियों में राज्यों के अधिकारों की रक्षा की बात कही। मेकेदाटु परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया। इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, किसानों, खनिज संपदा और ड्रग्स तस्करी रोकने जैसे मुद्दे भी बैठक में उठाए गए।

तमिलनाडु ने भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर मांगी गारंटी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने भी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर केंद्र से स्पष्ट आश्वासन की मांग की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को संसद में मौजूदा प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में कमी का नुकसान नहीं होना चाहिए। हालांकि, विजय ने लोकसभा की 543 सीटों को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग नहीं की। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठे इन मुद्दों ने एक बार फिर Delimitation 2026, South India Representation और Lok Sabha Seats को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज कर दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.