August 30, 2026

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बिहार चुनाव 2025: दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह गिरफ्तार, सियासत में उबाल

चुनावी हिंसा का शिकार: दुलारचंद यादव की संदिग्ध मौत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच मोकामा सीट पर सियासत और अपराध की घिनौनी साझेदारी एक बार फिर सामने आ गई है। जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की गुरुवार को हुई मौत ने पूरे राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सनसनीखेज खुलासा किया है—ना कोई गोली लगी, ना कोई घातक हथियार। बल्कि, फेफड़ों में गंभीर चोट और कई पसलियां टूटने से कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर हुआ, जो मौत की वजह बना। सवाल उठता है कि चुनाव प्रचार के दौरान ऐसी हिंसक झड़प कैसे हुई? दुलारचंद यादव मोकामा के ही निवासी थे और जन सुराज उम्मीदवार पियूष प्रियदर्शी (लल्लू मुखिया) के मजबूत समर्थक माने जाते थे। घटना के वक्त जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों के साथ टकराव हुआ, जिसमें पथराव और मारपीट की खबरें हैं। शुरुआती अफवाहों में गोलीबारी की बात कही गई, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यह मौत न सिर्फ एक व्यक्ति की जिंदगी का अंत है, बल्कि बिहार की चुनावी लोकतंत्र पर करारा प्रहार है।

तीन FIR और पुलिस की सख्ती: अनंत सिंह पर शिकंजा

पटना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अब तक तीन FIR दर्ज की हैं। पहली FIR मृतक दुलारचंद के पोते की शिकायत पर भदौर थाने में दर्ज हुई, जिसमें अनंत सिंह समेत चार अन्य—कर्मवीर, राजवीर, छोटन सिंह और मणिकांत ठाकुर—के नामजद हैं। दूसरी FIR प्रतिद्वंद्वी गुट की ओर से और तीसरी पुलिस की स्वत: जांच पर आधारित। इन FIR में हत्या, दंगा भड़काने और चुनावी हिंसा के आरोप लगाए गए हैं। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने 80 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी अनंत सिंह पर फोकस रहा। वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान और घटनास्थल की जांच से साबित हुआ कि अनंत सिंह घटनास्थल पर मौजूद थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने भी पुलिस को अलर्ट किया, जहां अनंत सिंह के समर्थकों की हिंसक हरकतें कैद हैं। यह कार्रवाई चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों का नतीजा है, जिसने DGP से रिपोर्ट मांगी थी और पटना ग्रामीण SP सहित चार अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया।

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आधी रात का ऑपरेशन: बाढ़ से पटना तक ड्रामा

1 नवंबर की देर रात पटना SSP कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में भारी फोर्स ने बाढ़ के कारगिल मार्केट स्थित अनंत सिंह के आवास पर धावा बोला। अनंत सिंह को उनके दो सहयोगी मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के साथ हिरासत में लिया गया। SSP और DM त्यागराजन एसएम ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरफ्तारी की पुष्टि की। अनंत सिंह ने सहयोग किया, लेकिन उनके समर्थक भारी संख्या में जुटे। पुलिस ने चालाकी से काफिले को पटना मोड़ लिया और उन्हें अज्ञात सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया। सुबह कोर्ट में पेशी हुई, जहां रिमांड की मांग की गई। मोकामा, पंडारक और आसपास के इलाकों में रातभर छापेमारी चली, जिसमें और गिरफ्तारियां संभावित हैं। CIID ने जांच की कमान संभाली है, DIG जयंत कांत के नेतृत्व में। यह ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि सोशल मीडिया पर ही पहले खबर लीक हुई।

राजनीतिक भूचाल: जेडीयू को झटका, विपक्ष का हल्ला

अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने जेडीयू को करारा झटका दिया है। मोकामा से NDA समर्थित उम्मीदवार के रूप में वे मजबूत थे, लेकिन अब उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने ‘जंगलराज की वापसी’ का आरोप लगाया, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज ने न्याय की मांग की। X (पूर्व ट्विटर) पर बहस छिड़ गई—कुछ इसे सोशल मीडिया की जीत बता रहे, तो कुछ राजनीतिक साजिश। क्या यह BJP-JDU गठबंधन में दरार का संकेत है? चुनाव आयोग की सख्ती से साफ है कि हिंसा बर्दाश्त नहीं। अनंत सिंह से पूछताछ जारी है, और जांच नए सिरे से तेज।

आगे की चुनौतियां: कानून बनाम सियासत

यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि बिहार की अपराध-राजनीति के गठजोड़ का आईना है। अनंत सिंह जैसे बाहुबलियों की गिरफ्तारी से कानून का डर पैदा होता है, लेकिन चुनावी सुरक्षा पर सवाल बरकरार। क्या मोकामा में शांति लौटेगी? या यह हिंसा की श्रृंखला का आगाज है? बिहार की राजनीति, जो अक्सर खून से रंगी होती है, अब न्याय की कसौटी पर खड़ी है। पुलिस ने और गिरफ्तारियां जल्द होने का ऐलान किया है। कुल मिलाकर, यह घटना लोकतंत्र की मजबूती का टेस्ट है—क्या कानून सबके ऊपर है, या सियासत का गुलाम?

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