मध्य पूर्व में भूचाल: दोहा पर इज़राइली हमले और भारत की संतुलित प्रतिक्रिया

दोहा में इज़राइली एयरस्ट्राइक

9 सितंबर 2025 को इज़राइल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाकर एक साहसिक और विवादास्पद एयरस्ट्राइक की। इस हमले ने मध्य पूर्व की पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और जटिल कर दिया। इज़राइल ने इसे एक स्वतंत्र सैन्य ऑपरेशन बताया, जिसका उद्देश्य 7 अक्टूबर 2023 के हमले के लिए जिम्मेदार हमास नेताओं को निशाना बनाना था। हमले में हमास के पांच सदस्य मारे गए, जिनमें मुख्य वार्ताकार खलिल अल-हय्या का बेटा और उनके कार्यालय का निदेशक शामिल था, लेकिन हमास ने दावा किया कि इसका कोई भी शीर्ष नेता नहीं मारा गया। कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का “कायराना उल्लंघन” करार दिया और एक कतरी सुरक्षा अधिकारी की मौत की पुष्टि की।

भारत की प्रतिक्रिया: UNHRC में कड़ा रुख

भारत ने 16 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में इस हमले पर गहरी चिंता जताई। भारत के प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने कतर की संप्रभुता के उल्लंघन की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को इस तरह की कार्रवाइयों से खतरा है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीति के रास्ते पर चलने की अपील करते हैं।” यह बयान भारत की संतुलित विदेश नीति का परिचायक है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत का संतुलन: इज़राइल और कतर के साथ संबंध

भारत का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इज़राइल का एक मजबूत रणनीतिक साझेदार रहा है, खासकर रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में। दूसरी ओर, कतर भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो प्राकृतिक गैस और तेल आपूर्ति में बड़ा योगदान देता है। इसके अलावा, कतर में 8 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच गहरे सामाजिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। इस हमले ने भारत को एक कूटनीतिक चुनौती दी, लेकिन भारत ने साबित किया कि वह किसी एक खेमे में खड़ा नहीं होता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति के साथ खड़ा है।

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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कतर का गुस्सा

इज़राइल ने दावा किया कि यह हमला पूरी तरह से उसकी खुफिया जानकारी पर आधारित था और इसे “पूर्ण रूप से स्वतंत्र ऑपरेशन” बताया। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने स्वीकार किया कि उसे हमले की पूर्व जानकारी थी, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने कतर को सूचित करने की कोशिश की थी। कतर ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सूचना “विस्फोटों की आवाज के साथ” मिली, और इसे “झूठी अफवाह” करार दिया। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने इसे “राज्य आतंकवाद” बताया और गाजा शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका से हटने की घोषणा की।

वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक जटिलताएं

यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक भूचाल था। कतर, जो गाजा में युद्धविराम के लिए मध्यस्थता कर रहा था, ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर हमला माना। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे कतर की संप्रभुता का “घोर उल्लंघन” बताया और सभी पक्षों से कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील की। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों ने भी इसकी निंदा की। अमेरिका ने इस हमले को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया, लेकिन हमास को खत्म करने को एक “योग्य लक्ष्य” बताया।

भारत की परिपक्व कूटनीति

भारत का इस मामले में रुख उसकी परिपक्व और संतुलित विदेश नीति का उदाहरण है। एक ओर, वह इज़राइल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देता है, वहीं दूसरी ओर, कतर जैसे खाड़ी देशों के साथ आर्थिक और सामाजिक संबंधों को बनाए रखता है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के साथ खड़ा है। यह बयान न केवल मध्य पूर्व में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और संतुलित नेतृत्व के रूप में उभर रहा है।

स्थिरता की राह

दोहा पर इज़राइली हमला मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हुआ है। भारत की प्रतिक्रिया ने न केवल इसकी कूटनीतिक परिपक्वता को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि वह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन और संयम कितना महत्वपूर्ण है। भारत ने इस कूटनीतिक परीक्षा में अपनी स्थिति मजबूत की है, और यह संदेश दिया है कि वह किसी भी परिस्थिति में अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति के पक्ष में खड़ा रहेगा।

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