ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ साथ
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ एक साथ आते नजर आ रहे हैं। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यूरोपीय संघ आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करना और उसकी आय के प्रमुख स्रोतों पर दबाव बढ़ाना है। यूरोपीय संघ ने आर्थिक सख्ती के साथ कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर भी जोर दिया है।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का क्या है मकसद?
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने पिछले महीने ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया था। अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से अलग करना और उसकी आय के स्रोतों को सीमित करना है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों की पहचान करने की बात कही है। इसके अलावा डिजिटल संपत्ति, तकनीक और जहाजरानी से जुड़ी गतिविधियों पर भी संभावित प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया गया है।
यूरोपीय संघ ने ईरान के सामने रखीं कई शर्तें
यूरोपीय संघ ने ईरान पर आर्थिक दबाव के साथ उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। ईयू ने ईरान से इन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही क्षेत्र और यूरोप में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियां रोकने, यूक्रेन में रूस के युद्ध को सैन्य समर्थन बंद करने और अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा तथा दमन खत्म करने का दबाव भी बनाया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर यूरोपीय संघ की नजर
ईरान के खिलाफ बढ़ते दबाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। यूरोपीय संघ ने इस क्षेत्र में जहाजों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। ईयू का कहना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रहना जरूरी है। साथ ही उसने संकेत दिया है कि अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं।
ईरान पर आर्थिक दबाव के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ अमेरिका, जी7 और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करने की बात कह रहा है। हालांकि, ईयू ने यह भी स्पष्ट किया है कि तनाव कम करने और शांति समझौते के लिए बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए। अमेरिका के अनुसार, ईरान के सामने वैश्विक अलगाव या सामान्य स्थिति की ओर लौटकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में शामिल होने के विकल्प हैं। ऐसे में पश्चिमी देशों के बढ़ते आर्थिक दबाव के साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहने की संभावना है।
