August 29, 2026

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गणपति विसर्जन या अपमान? क्यों हो रहा है बप्पा के साथ ऐसा व्यवहार?

क्या आपने हाल ही में एक ऐसा वीडियो देखा, जिसमें गणपति बप्पा की मूर्तियों को JCB से कुचला जा रहा है? लोग उनके हाथ, पैर और सिर तोड़ रहे हैं… और फिर उसी पर नाच रहे हैं! यह दृश्य न केवल आस्था पर चोट करता है, बल्कि हमारी संस्कृति और सनातन परंपरा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

हर साल गणेशोत्सव में हम पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ बप्पा को अपने घर लाते हैं। दस दिन तक आरती, पूजा और भोग करते हैं। कहते हैं, गणपति बप्पा मोरया! लेकिन विसर्जन के बाद क्या होता है? क्या हमने कभी सोचा कि जिन भगवान को हम इतने सम्मान से बुलाते हैं, उनके साथ अंत में ऐसा बर्ताव क्यों?

गणपति विसर्जन का असली उद्देश्य क्या था?

गणपति विसर्जन का अर्थ भगवान को अपमानित करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित कर प्रकृति को सौंपना है।
लेकिन आज क्या हो रहा है?

  • मूर्तियों को JCB से तोड़ा जा रहा है
  • उनके अंगों को क्षत-विक्षत कर मलबा बना दिया जाता है
  • श्रद्धा की जगह लापरवाही और असंवेदनशीलता हावी है

क्या यही हमारी सनातन संस्कृति है?

कौन हैं ये लोग? और क्यों चुप है समाज?

क्यों कोई आवाज़ नहीं उठा रहा? क्या हमारी आस्था इतनी कमजोर हो गई है कि भगवान का अपमान भी हमें स्वीकार है?
गणपति सिर्फ मूर्ति नहीं हैं — वे विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता हैं।

धर्म और आस्था का अपमान – सिर्फ पाप नहीं, अपराध है

किसी भी धर्म में, किसी भी भगवान के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। आज अगर गणपति हैं, कल किसी और देवता के साथ ऐसा हो सकता है।
हमें यह समझना होगा कि भगवान का अपमान केवल धार्मिक अपराध नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पतन का संकेत है।

समाज को संदेश

यदि आप भी मानते हैं कि यह गलत है, तो इस संदेश को फैलाइए।
गणपति का स्वागत आदर से हुआ, तो विदाई भी सम्मान और संस्कृति के अनुसार होनी चाहिए।
अगर आप इसके खिलाफ नहीं बोलते, तो यह अपमान कल और बढ़ेगा।

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