नेपाल में Gen Z यानी 1997-2012 के बीच जन्मी युवा पीढ़ी के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन अब बेहद हिंसक रूप ले चुके हैं। यह आंदोलन शुरू हुआ सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ, लेकिन अब यह नेपाल में बड़े स्तर का जनविस्फोट बन गया है।
प्रधानमंत्री के घर पर हमला
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के घर में आग लगा दी। यह घटना नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई और इसे लेकर पूरे देश में गुस्से की लहर है। प्रधानमंत्री के निवास पर हमला दर्शाता है कि युवा नाराजगी अब सीधे सत्ता केंद्र तक पहुँच चुकी है।
वित्त मंत्री पर हमला
साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री बिष्णु प्रसाद पौडेल को काठमांडू की सड़कों पर दौड़ा लिया। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि युवा प्रदर्शनकारियों में असंतोष और गुस्सा चरम सीमा पर है।
आंदोलन की शुरुआत
यह आंदोलन सोमवार को शुरू हुआ था, जब नेपाल सरकार ने सभी सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगा दिया। युवाओं ने इसे अपनी आवाज़ दबाने के प्रयास के रूप में देखा। हालांकि सरकार ने कुछ समय बाद ऐप्स को बहाल कर दिया, लेकिन आंदोलन शांत नहीं हुआ।
कर्फ्यू के बावजूद हिंसा
नेपाल सरकार ने मंगलवार को कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतरे और आगजनी, तोड़फोड़ और हमलों की घटनाएं लगातार दर्ज हुईं। यह संकेत है कि युवा अब किसी भी तरह की रोकथाम से नहीं डर रहे।
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भ्रष्टाचार और असंतोष की जड़
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सोशल मीडिया बैन ही इस हिंसा की वजह नहीं है। नेपाल में भ्रष्टाचार, नेपोटिज़्म और बेरोज़गारी लंबे समय से युवाओं में असंतोष पैदा कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रदर्शनकारियों का गुस्सा अब चरम सीमा पर पहुँच गया है।
सोशल मीडिया और युवा सक्रियता
Gen Z की यह पीढ़ी सोशल मीडिया के माध्यम से पहले ही अपनी आवाज़ उठा चुकी थी। “नेपो बेबी” कैंपेन और भ्रष्टाचार के खिलाफ ट्रेंड ने युवाओं में आंदोलन की भावना को और मजबूत किया।
अंतरराष्ट्रीय नजरें
नेपाल के विरोध आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी खींचा है। पड़ोसी देश और मानवाधिकार संगठन इस हिंसा और कर्फ्यू की स्थिति पर चिंतित हैं।

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