August 29, 2026

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नेपाल में Gen Z का बवाल सोशल मीडिया बैन या भ्रष्टाचार और सिस्टम के खिलाफ बगावत?

नेपाल इन दिनों भारी राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। काठमांडू की सड़कों पर हजारों युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। संसद भवन पर हमला, पुलिस की गोलीबारी और 19 लोगों की मौत ने पूरे दक्षिण एशिया को हिला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह बवाल सिर्फ सोशल मीडिया बैन को लेकर है, या इसके पीछे कहीं और गहरा असंतोष छिपा है।

सोशल मीडिया बैन की चिंगारी

नेपाल सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया कि सभी सोशल मीडिया कंपनियों को देश में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कंपनियों ने इस पर कदम उठाने में देरी की, जिसके बाद सरकार ने एक हफ्ते में ही Facebook, WhatsApp और Instagram जैसे ऐप्स पर सीधा बैन लगा दिया। इसके तुरंत बाद नेपाल की Gen Z पीढ़ी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा गुस्से में सड़कों पर उतर आए।

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असली वजह: भ्रष्टाचार और नेपोटिज़्म

हालांकि सिर्फ सोशल मीडिया बैन इतना बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं कर सकता। असली गुस्सा नेपाल के युवाओं में भ्रष्टाचार और नेपोटिज़्म के खिलाफ है। नेताओं के बच्चों और परिवारों की आलीशान लाइफस्टाइल सोशल मीडिया पर दिखती रही, जबकि आम युवा बेरोज़गारी, महँगाई और अवसरों की कमी से जूझते रहे। यही कारण है कि ‘नेपो बेबी’ कैंपेन नेपाल में ट्रेंड करने लगा।

पहले से मौजूद असंतोष

नेपाल में असंतोष कोई नई बात नहीं है। पिछले साल भी राजशाही की वापसी की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे। इसके अलावा, पिछले चार वर्षों में तीन बड़े घोटाले सामने आए, जिन्हें सोशल मीडिया पर लगातार उजागर किया गया। इन घटनाओं ने आम नागरिकों का भरोसा सरकार से कमज़ोर कर दिया।

युवाओं का गुस्सा क्यों फूटा?

जब सरकार ने सोशल मीडिया बैन किया, तो युवाओं को लगा कि यह सिर्फ ऐप्स पर पाबंदी नहीं बल्कि उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश है। पहले से मौजूद असंतोष और अविश्वास ने इस कदम को और भड़काया। इसी वजह से गुस्सा इतना बढ़ा कि संसद भवन तक को निशाना बनाया गया और मंत्रियों को सड़कों पर घेरा गया।

बड़ा सवाल: आंदोलन का असली मकसद क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह आंदोलन वास्तव में किसके खिलाफ है। क्या यह सिर्फ सोशल मीडिया वापस लाने की मांग है? या फिर यह नेपाल की नई पीढ़ी की उस बगावत का संकेत है जो भ्रष्टाचार, नेपोटिज़्म और व्यवस्था की नाकामियों के खिलाफ उठ खड़ी हुई है?

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