हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच चली तनातनी ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया। भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया। इस दौरान भारत को रूस, इजरायल, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों का खुला समर्थन मिला, जबकि पाकिस्तान का कोई भी करीबी सहयोगी, यहाँ तक कि चीन भी, उसके पक्ष में खड़ा नहीं हुआ। यह भारत की कूटनीतिक जीत का स्पष्ट प्रमाण है।
रूस: भारत का सच्चा मित्र
इतिहास साक्षी है कि रूस हमेशा भारत के साथ एक विश्वसनीय मित्र के रूप में खड़ा रहा है। इस बार भी रूस ने अपनी दोस्ती निभाई। ऑपरेशन सिंदूर से ठीक एक दिन पहले, 5 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत हुई। पुतिन ने पहलगाम आतंकी हमले पर गहरा दुख व्यक्त किया और आतंकवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष को पूर्ण समर्थन देने की बात कही। रूस के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। यह रुख दर्शाता है कि रूस भारत के साथ हर कदम पर खड़ा है।
इजरायल का मजबूत समर्थन
इजरायल ने न केवल भारत को हारूप और बराक-8 जैसे उन्नत हथियार प्रदान किए, बल्कि कूटनीतिक मंच पर भी भारत का खुलकर समर्थन किया। भारत में इजरायली राजदूत रुवेन अजर ने 7 मई 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इजरायल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है। आतंकवादियों को यह समझना होगा कि निर्दोषों के खिलाफ अपराध करने के बाद उनके पास छिपने की कोई जगह नहीं है।” इजरायल का यह रुख भारत के लिए एक मजबूत समर्थन का प्रतीक है।
नीदरलैंड और ब्रिटेन की मुखर आवाज
नीदरलैंड के सांसद गीर्ट विल्डर्स ने भारत के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाते हुए एक्स पर लिखा, “मैं भारत से प्यार करता हूँ, 100% कश्मीर भारत का है।” उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। वहीं, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और कई ब्रिटिश सांसदों ने भारत के ऑपरेशन को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह समर्थन पाकिस्तानी लॉबी के लिए करारा जवाब था।
फ्रांस और अमेरिका का रुख
फ्रांस ने भी भारत के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की। राफेल विमानों को लेकर पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए झूठ को खारिज करते हुए फ्रांस ने स्पष्ट किया कि उसे किसी राफेल के गिराए जाने की कोई जानकारी नहीं है। फ्रांस ने भारत के ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ एक जरूरी कदम बताया। दूसरी ओर, अमेरिका ने भले ही खुलकर बयान न दिया हो, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक पुराना ट्वीट वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था, “अमेरिका पाकिस्तान की ढाल नहीं बनेगा।” अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में पाकिस्तान के लिए सिफारिश करने के बावजूद अमेरिका का भारत के खिलाफ कोई बयान न देना भारत की कूटनीतिक जीत को दर्शाता है।
चीन की तटस्थता और पाकिस्तान की अकेलापन
पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त माने जाने वाला चीन भी इस बार तटस्थ रहा। चीन ने कहा कि वह भारत के हमले को सही नहीं मानता, लेकिन आतंकवाद का भी समर्थन नहीं करता। यह रुख न तो पाकिस्तान के पक्ष में था और न ही भारत के खिलाफ। इस तरह, पाकिस्तान वैश्विक मंच पर पूरी तरह अकेला पड़ गया।
भारत का ऑपरेशन सिंदूर न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक सशक्त कदम था, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का भी प्रतीक है। रूस, इजरायल, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों का समर्थन भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। वहीं, पाकिस्तान की बौखलाहट और उसका अकेलापन यह साबित करता है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख दुनिया भर में स्वीकार्य है।

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