ज़रा सोचिए, जिस अस्पताल को लोग जीवन बचाने की उम्मीद से देखते हैं… वही अस्पताल अगर मासूमों की मौत की वजह बन जाए, तो दिल पर क्या गुज़रेगी? इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में कुछ ऐसा ही हुआ। यहाँ चूहों के हमले से दो नवजात बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ इंदौर, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देशभर में आक्रोश और सदमे का कारण बन गई।
घटना का विवरण
घटना शिशु शल्य चिकित्सा विभाग में हुई। बताया जा रहा है कि अस्पताल की ग़लत व्यवस्थाओं और लापरवाही के कारण वार्ड में चूहों की भरमार थी। इसी दौरान नवजात बच्चियों पर हमला हुआ और उनकी ज़िंदगी छिन गई।
जांच और कार्रवाई
राज्य सरकार ने तुरंत जांच कमेटी बनाई और रिपोर्ट सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई। शिशु शल्य विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. ब्रजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया और उनकी जगह एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक लड्ढा को नया प्रमुख बनाया गया।
छुट्टी पर गए अधीक्षक
इस बीच अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने अचानक “बेहद खराब स्वास्थ्य” का हवाला देकर 15 दिन की छुट्टी ले ली। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह छुट्टी वाकई सेहत की वजह से है… या फिर जिम्मेदारी से बचने का बहाना?
पहले की गई कार्रवाई
इससे पहले ही 6 अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। कुछ को निलंबित किया गया और कुछ को पद से हटा दिया गया।
सवालों के घेरे में अस्पताल प्रशासन
लोगों का कहना है कि सिर्फ अधिकारियों को हटाने से समाधान नहीं होगा। अगर अस्पतालों की स्थिति नहीं सुधरी तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
सरकार पर उठे सवाल
विपक्ष और आम जनता लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं। आखिर सरकारी अस्पतालों में इतनी लापरवाही क्यों है?
आम जनता का गुस्सा
सोशल मीडिया पर लोग गुस्से का इज़हार कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि मासूमों की मौत का असली दोषी कौन है – अस्पताल प्रशासन, सरकार या दोनों?
व्यापक समस्या की ओर इशारा
यह घटना सिर्फ इंदौर की नहीं है। देशभर के सरकारी अस्पतालों की यही हालत है। कहीं साफ-सफाई नहीं, कहीं डॉक्टरों की कमी, तो कहीं सुविधाओं का अभाव।

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