जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में शुक्रवार रात पाकिस्तान की ओर से किए गए कायराना हवाई हमले ने झुंझुनूं के मेहरादासी गांव के एक वीर सपूत को हमसे छीन लिया। भारतीय वायुसेना के मेडिकल असिस्टेंट सार्जेंट सुरेंद्र कुमार ने 39 विंग उधमपुर में अपनी ड्यूटी निभाते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की खबर ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव और जिले को शोक में डुबो दिया।
14 साल की निष्ठा और देशसेवा
सुरेंद्र कुमार पिछले 14 वर्षों से भारतीय वायुसेना की मेडिकल विंग में सेवारत थे। उनकी मेहनत, लगन और देशभक्ति की भावना ने उन्हें एक आदर्श सैनिक बनाया। उनके चाचा सुभाष मोगा ने बताया कि सुरेंद्र एक मिलनसार और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। वे न केवल अपने कर्तव्यों का पालन करते थे, बल्कि गांव के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी सलाह और टिप्स ने कई युवाओं को देशसेवा के पथ पर आगे बढ़ने में मदद की।
परिवार का गौरव, गांव का अभिमान
सुरेंद्र कुमार मेहरादासी गांव के गौरव थे। हाल ही में उन्होंने अपने नए मकान का गृह प्रवेश किया था। 15 अप्रैल को वे अपनी पत्नी सीमा और बच्चों के साथ ड्यूटी पर वापस लौटे थे। उनके पिता शिशुपाल सिंह सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त थे, जिनका निधन हो चुका है। सुरेंद्र अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे, जिससे उनकी शहादत का दुख परिवार के लिए और भी गहरा हो गया है।
पत्नी और बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़
सुरेंद्र कुमार अपनी पत्नी सीमा और दो मासूम बच्चों—5 साल के बेटे और 8 साल की बेटी—को पीछे छोड़ गए। उनकी पत्नी सीमा को जब पति से संपर्क न होने की बात पता चली, तो उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत नवलगढ़ के राजकीय जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला कलेक्टर राम अवतार मीणा और एसपी शरद चौधरी ने अस्पताल पहुंचकर सीमा की सेहत की जानकारी ली और डॉक्टरों को विशेष निर्देश दिए। इसके बाद दोनों अधिकारी मेहरादासी गांव पहुंचे और शहीद की मां को सांत्वना दी।
शहादत की सूचना और परिवार का हाल
सेना मुख्यालय ने सुरेंद्र की शहादत की सूचना उनके जीजा जयप्रकाश को फोन पर दी। हालांकि, उनकी मां और पत्नी को अभी तक आधिकारिक तौर पर यह दुखद समाचार नहीं बताया गया है। सीमा को अपने पति की शहादत का अंदेशा हो गया था, जिसके कारण उनकी तबीयत और खराब हो गई। परिवार के अनुसार, सीमा अपने दादा के निधन के कारण 10 दिन पहले बच्चों के साथ अपने पीहर नवलगढ़ आई थीं।
गांव में शोक की लहर, पार्थिव देह का इंतजार
शहीद सुरेंद्र कुमार की पार्थिव देह को उनके गांव मेहरादासी कब लाया जाएगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिली है। गांव में हर तरफ शोक की लहर है। लोग अपने इस वीर सपूत की शहादत पर गर्व महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनके जाने का दुख भी बराबर सता रहा है। सुरेंद्र की मां और परिवार के अन्य सदस्य इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
देश के लिए एक अनमोल बलिदान
सुरेंद्र कुमार की शहादत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हमारे सैनिक देश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनकी देशभक्ति और बलिदान की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। जिला प्रशासन और स्थानीय लोग शहीद के परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

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