August 29, 2026

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 जम्मू-कश्मीर: पहलगाम में हिंदू पर्यटकों की हत्या के खिलाफ कश्मीरी पंडित समाज का कैंडल मार्च, उठा इंसाफ का स्वर

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। जहां इस दर्दनाक हमले में कई निर्दोष हिंदू पर्यटकों की जान गई, वहीं अब इस घटना के खिलाफ जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। कश्मीरी पंडित समाज ने सोमवार शाम राजा हरि सिंह चौक, जम्मू में एक कैंडल मार्च निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

कैंडल मार्च: एक मौन लेकिन मजबूत संदेश

कश्मीरी पंडित समाज द्वारा आयोजित यह कैंडल मार्च एक शांति पूर्ण विरोध था, लेकिन उसका संदेश बेहद मजबूत था। हाथों में मोमबत्तियाँ और दिलों में दुःख लिए सैकड़ों लोग एकत्रित हुए और “आतंकवाद मुर्दाबाद”, “शहीदों को श्रद्धांजलि”, “हमें न्याय चाहिए” जैसे नारे लगाए।

इस मार्च का उद्देश्य न सिर्फ हमले में मारे गए लोगों को याद करना था, बल्कि यह भी बताना था कि कश्मीरी हिंदू समाज अब खामोश नहीं रहेगा। यह विरोध आतंक के खिलाफ, और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए था।

कश्मीरी पंडित समाज का बयान

मार्च में भाग ले रहे वरिष्ठ सदस्य संजय टिक्कू ने कहा:

“हम दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहे हैं। अब यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता कि पर्यटक बनकर आए लोग भी निशाने पर हों। यह सिर्फ एक समुदाय पर हमला नहीं है, यह कश्मीर की शांति पर हमला है।”

वहीं एक युवा कार्यकर्ता रुचि भट ने भावुक होते हुए कहा:

“हमारे अपने लोग मारे जा रहे हैं, और आज भी हमें डर के साए में जीना पड़ रहा है। सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। हमें सुरक्षा नहीं, न्याय चाहिए।”

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राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का सवाल

इस हमले के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP सहित कई दलों ने हमले की निंदा की है और सरकार से जवाब मांगा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा:

“यह हमला दर्शाता है कि कश्मीर में शांति का दावा अधूरा है। अगर पर्यटक भी सुरक्षित नहीं हैं, तो कौन है?”

वहीं बीजेपी की ओर से कहा गया कि आतंकी भारत की एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को निशाना बना रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें करारा जवाब देगी।

हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाना – चिंता का विषय

पहलगाम में हालिया हमला उस दिशा की ओर इशारा करता है, जिसमें आतंकियों का मकसद धार्मिक आधार पर निशाना बनाना है। यह हमला सिर्फ एक आतंकी हरकत नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की कोशिश है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टूरिज़्म को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच इस तरह का हमला, एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

जम्मू में गूंजा गुस्सा – प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल

कैंडल मार्च में भाग लेने वाले कई लोगों ने स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठाए।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा:

“जब हम खतरे में होते हैं, तो प्रशासन मूकदर्शक क्यों बन जाता है? पहले टारगेट किलिंग्स, अब पर्यटकों की हत्या – क्या कोई सुरक्षित है?”

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग की और सुरक्षा नीति की समीक्षा करने की अपील की।

एकजुटता का प्रदर्शन – सभी धर्मों के लोगों ने लिया हिस्सा

कैंडल मार्च की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ कश्मीरी पंडित ही नहीं, बल्कि सिख, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोग भी शामिल हुए। यह एक सांप्रदायिक सौहार्द और एकता का प्रतीक था, जो आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हो रहा है।

क्या मांग की गई कैंडल मार्च में?

  1. पहलगाम आतंकी हमले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच।
  2. जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  3. आतंकी हमले के दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई।
  4. पीड़ित परिवारों को आर्थिक मुआवजा और पुनर्वास सहायता।
  5. केंद्र सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग।

कश्मीरी पंडित समाज का यह कैंडल मार्च सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी और उम्मीद दोनों है। चेतावनी उन ताकतों को जो कश्मीर की फिज़ा बिगाड़ना चाहते हैं, और उम्मीद सरकार से – कि अब कोई और पहलगाम न दोहराया जाए।

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