West Bengal: सोशल मीडिया के एक वीडियो में दिखाया गया है कि त्योहारों की सजावट के बीच स्थानीय निवासी इंटरव्यू के दौरान बंगाली भाषा में बात करने पर ज़ोर देते नज़र आते हैं, जिसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ पाती। इस घटनाक्रम को कुछ लोग हिंदी वर्चस्व के खिलाफ़ प्रतिरोध के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक दार्जिलिंग की भाषाई विडंबना की ओर इशारा कर रहे हैं।
West Bengal का भाषाई समीकरण क्या कहता है?
2011 की जनगणना के अनुसार, West Bengal में नेपाली बोलने वालों की आबादी लगभग 40% है। इसके बाद बंगाली 26.5% और हिंदी करीब 11% के आसपास है। आंकड़े बताते हैं कि यह इलाका लंबे समय से भाषाई विविधता का केंद्र रहा है।
गोरखा आंदोलन और बंगाली नीतियों पर आरोप
गोरखा समुदाय लंबे समय से अलग राज्य की मांग करता रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि बंगाली नीतियों ने क्षेत्रीय पहचान, भाषा और अधिकारों को कमजोर किया है, जिससे असंतोष लगातारबना हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर भाषाई अस्मिता की बहस फिर तेज़
यह पूरा मामला एक बार फिर भारत में भाषाई अस्मिता, संविधान में मान्यता प्राप्त 22 अनुसूचित भाषाओं, और बहुभाषी देश में सांस्कृतिक थोपे जाने की धारणा जैसे मुद्दों पर चल रही राष्ट्रीय बहस को तेज़करता दिख रहा है।

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