महाराष्ट्र में चल रहा भाषा विवाद अब तमिलनाडु तक पहुंच गया है। तिरुवल्लुर जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पश्चिम बंगाल के चार युवकों को केवल बंगाली भाषा में बात करने के कारण बेरहमी से पीटा गया। स्थानीय लोगों ने इन मजदूरों को बांग्लादेशी समझकर लोहे की छड़ों और लाठियों से हमला किया। इस घटना ने न केवल भाषाई असहिष्णुता को उजागर किया है, बल्कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सम्मान पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। पीड़ितों के परिवार ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है।
घटना का विवरण
यह घटना 15 जुलाई 2025 की शाम को तिरुवल्लुर जिले में हुई। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले सुजान शेख, मिलन शेख, साहिल शेख और बाबू शेख तीन हफ्ते पहले चेन्नै में निर्माण कार्य के लिए गए थे। शिकायत के अनुसार, जब ये युवक बंगाली में बात कर रहे थे, तो कुछ स्थानीय लोगों ने उनसे उनका नाम और पता पूछा। बंगाली भाषा सुनते ही स्थानीय लोगों ने उन्हें बांग्लादेशी समझ लिया और उन पर लोहे की छड़ों और लाठियों से हमला कर दिया। इस हमले में चारों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें तिरुवल्लुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जिसके बाद वे तुरंत अपने गृह जिले मुर्शिदाबाद लौट आए।
पीड़ितों की स्थिति
सुजान और मिलन के पिता आशाबुल शेख ने बताया कि इस हमले में उनके छोटे बेटे का हाथ टूट गया, जिसके लिए सर्जरी करवानी पड़ी। वह अभी भी नर्सिंग होम में भर्ती है। बड़े बेटे सुजान को भी गंभीर चोटें आई हैं, और दोनों को कई हफ्तों तक बिस्तर पर रहना होगा। इस घटना ने न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डाला है।
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आर्थिक नुकसान और मानसिक आघात
घायल मजदूर मिलन शेख ने बताया कि वे पहली बार चेन्नै में काम करने गए थे। इस हमले के बाद उन्हें न केवल शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी, बल्कि उनकी 11 दिन की मजदूरी भी नहीं मिली। घर लौटने के लिए मिलन को अपने पिता से 12 हजार रुपये मंगवाने पड़े। इस घटना ने पीड़ितों और उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। प्रवासी मजदूरों के लिए यह घटना एक डरावना अनुभव बन गई है, जो अन्य राज्यों में काम करने की उनकी हिम्मत को तोड़ सकती है।
परिवार की मांग
पीड़ितों के परिवार ने मुर्शिदाबाद पुलिस में 17 जुलाई 2025 को शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। परिवार का कहना है कि इस तरह की घटनाएं प्रवासी मजदूरों के लिए असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं और भाषाई विविधता के सम्मान को कमजोर करती हैं।
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