MS Dhoni Defamation Case: 100 करोड़ के मानहानि मामले में बड़ा अपडेट, धोनी के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग पर कोर्ट का फैसला
MS Dhoni Defamation Case
MS Dhoni Defamation Case: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े 100 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में नया मोड़ आ गया है। 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी स्कैंडल से कथित तौर पर जोड़ने को लेकर धोनी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार समेत अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। अब इस मामले में जी. संपत कुमार ने धोनी के बयान की प्रक्रिया से जुड़ी कुछ मांगें अदालत के सामने रखीं, जिन पर मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी अर्जियों को मंजूरी दे दी है।
धोनी के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग
जी. संपत कुमार की ओर से अदालत में मांग की गई कि एमएस धोनी का बयान दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। साथ ही, बिना एडिट की गई वीडियो रिकॉर्डिंग की कॉपी उन्हें और कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी को उपलब्ध कराई जाए। उनके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए अपनी मांग रखी। जस्टिस के. गोविंदराजन थिलकवादी ने मामले की जांच के बाद इन अर्जियों को मंजूरी देने पर सहमति जताई।
न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की भी मांग
संपत कुमार की पहली मांग थी कि धोनी का बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी नियुक्त किया जाए। दूसरी मांग वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ी थी, जबकि तीसरी मांग में कहा गया कि धोनी का बयान कोर्ट परिसर या किसी सरकारी भवन में ही दर्ज कराया जाए। उनका कहना था कि बयान की प्रक्रिया किसी फाइव स्टार होटल या निजी बंगले में नहीं होनी चाहिए।
धोनी को मिलेगा जवाब दाखिल करने का मौका
अदालत ने इन अर्जियों को नंबर दिए जाने के बाद एमएस धोनी को भी अपनी तरफ से जवाब दाखिल करने का अवसर देने की बात कही है। यानी धोनी इस मामले में काउंटर एफिडेविट दाखिल कर अपना पक्ष रख सकेंगे। फिलहाल अदालत ने जी. संपत कुमार की तीनों अर्जियों को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे 100 करोड़ रुपये के इस चर्चित मानहानि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
पहले भी कोर्ट पहुंच चुका है विवाद
पिछले साल 11 अगस्त को जस्टिस सीवी कार्तिकेयन ने मामले का ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था और वकील जी. जयश्री को धोनी का बयान दर्ज करने के लिए कमिश्नर नियुक्त किया गया था। हालांकि, संपत कुमार ने इस फैसले का विरोध करते हुए याचिका दायर की थी। बाद में पिछले साल 4 नवंबर को जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और मोहम्मद शफीक की डिवीजन बेंच ने उनकी अपील खारिज कर दी थी। अब मद्रास हाई कोर्ट के नए फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
