नई दिल्ली। दिल्ली की हवा पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। हर साल की तरह इस बार भी सर्दियों के साथ राजधानी में प्रदूषण का कहर लौट आया है। जहरीली हवा, धुंध में लिपटी सड़कें और सांस लेने में दिक्कत ये सब अब दिल्ली की पहचान बनते जा रहे हैं। इसी बीच दिल्ली सरकार के मंत्री सिरसा का एक बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है।कैमरे के सामने सिरसा ने कहा मैं दिल्ली के लोगों से माफी मांगता हूं। 9–10 महीनों में प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना किसी भी निर्वाचित सरकार के लिए संभव नहीं है। इस बयान के साथ ही उन्होंने यह साफ संकेत दे दिया कि मौजूदा प्रदूषण संकट कोई नई समस्या नहीं, बल्कि विरासत में मिली हुई चुनौती है।
विरासत की समस्या’ का तर्क और बढ़ता असंतोष
सिरसा का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण दशकों पुरानी समस्या है, जिसे एक साल के भीतर पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन इसके लिए समय चाहिए।मगर जनता के मन में सवाल वही पुराना है—
अगर समस्या विरासत की है, तो जवाबदेही किसकी है?और हर बार सरकार की तरफ से वही जवाब आता है समस्या पुरानी है, समय लगेगा।
9–10 महीने का तर्क सवालों के घेरे में सरकार
सिरसा का यह कहना कि 9–10 महीने पर्याप्त नहीं हैं, अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। दिल्ली की सरकार को सत्ता में आए हुए समय हो चुका है। ऐसे में विपक्ष का आरोप है कि हर साल नई शुरुआत और हर साल वही बहाने। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर सरकार पहले से जानती थी कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ेगा, तो पूर्व तैयारी क्यों नहीं की गई?

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