मुकेश अंबानी पहुंचे बद्रीनाथ, भक्तों संग किए धार्मिक अनुष्ठान और पूजा

भारतीय उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित पवित्र बद्रीनाथ धाम का दौरा किया और भगवान विष्णु की आराधना की। अंबानी जी मंदिर परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचे। उनके साथ सुरक्षा कर्मियों की टीम थी, जिन्होंने उन्हें भीड़भाड़ के बीच से सुरक्षित ढंग से मंदिर तक पहुंचाया।

भक्तों के साथ पूजा-अर्चना

मौके पर मौजूद भक्तों से मुलाकात के दौरान मुकेश अंबानी ने कुछ भक्तों के साथ सेल्फी भी ली। उन्होंने मंदिर में मौजूद लोगों से संवाद किया और मंदिर की पारंपरिक पूजा और अनुष्ठानों का अवलोकन किया। अंबानी जी ने भगवान विष्णु के सामने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और अपनी आस्था का प्रदर्शन किया।

परिवार संग नवरात्रि उत्सव

इससे पहले, 24 सितंबर को अंबानी परिवार ने नवरात्रि का आरंभिक उत्सव मनाया। इस दौरान मुकेश अंबानी, नीता अंबानी, उनके पुत्र आकाश अंबानी और अनंत अंबानी, श्लोका मर्चेंट, राधिका मर्चेंट सहित अन्य परिवारजन शामिल हुए। नवरात्रि के अवसर पर अंबानी परिवार ने पारंपरिक गरबा कार्यक्रमों में भाग लिया और गुजरात के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प सजावट के माध्यम से उत्सव स्थल को सजाया।

बद्रीनाथ का धार्मिक महत्व

बद्रीनाथ मंदिर हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है और यह 108 दिव्य दर्शनों में से एक है। यह पंच बद्री मंदिरों में शामिल है, जिनमें योग ध्यान बद्री, भविष्य बद्री, आदि बद्री और वृद्ध बद्री भी शामिल हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार, इस मंदिर को आदि शंकराचार्य ने पुनः स्थापित किया ताकि हिन्दू धर्म की महत्ता को पुनर्जीवित किया जा सके। बदरी विशाल के नाम से भी यह मंदिर प्रसिद्ध है।

धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि

बद्रीनाथ धाम न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहाँ आने वाले भक्त और पर्यटक न केवल भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि मंदिर परिसर और आसपास के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद भी उठाते हैं। मुकेश अंबानी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व का यहाँ आना श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बनता है और मंदिर की महत्ता को और बढ़ाता है।

मुकेश अंबानी का यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था का परिचायक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की गरिमा को भी दर्शाता है। परिवार के साथ नवरात्रि और मंदिर में अर्चना का यह संयोजन उनके सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को उजागर करता है

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