August 29, 2026

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सुप्रीम कोर्ट में INC के खिलाफ जनहित याचिका: रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग

याचिका का आधार और मांगें

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल, जो अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष हैं, ने यह याचिका दायर की है। इसके अतिरिक्त, याचिका में कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए गए ‘वोट-चोरी’ अभियान की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग भी शामिल है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह अभियान चुनाव आयोग की संवैधानिक विश्वसनीयता और निष्पक्षता को कमजोर करने के लिए शुरू किया गया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा प्रहार करता है।

प्रचार अभियान पर रोक की मांग

याचिका में मांग की गई है कि आईएनसी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, उनके प्रतिनिधियों और एजेंटों को इस मामले की सुनवाई के दौरान कोई भी ऐसा सार्वजनिक बयान, भाषण, प्रचार या प्रकाशन करने से रोका जाए, जो चुनाव आयोग की अधिकारिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित करे। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि वह कांग्रेस और इसके नेताओं द्वारा राष्ट्रव्यापी असंवैधानिक गतिविधियों, प्रचार और अभियानों से आहत हुए हैं। उनका कहना है कि ये गतिविधियां संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लंघन करती हैं, जो आईएनसी ने अपने रजिस्ट्रेशन के समय ली थी।

मतदाता सूची संशोधन में हस्तक्षेप का आरोप

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव आयोग को देशभर में मतदाता सूची के संशोधन का विशेष अधिकार प्राप्त है। लेकिन, कांग्रेस के प्रचार अभियान को इस संवैधानिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ‘वोट-चोरी’ जैसे शब्दों का प्रयोग और यह आरोप लगाना कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत कर रहा है, न केवल असंसदीय है, बल्कि यह भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का भी खुला उल्लंघन है।

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बिहार SIR मामला और सुप्रीम कोर्ट

याचिका में यह भी बताया गया है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले में कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल स्वयं याचिकाकर्ता हैं। ऐसे में, याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब तक यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, तब तक कांग्रेस और इसके नेताओं को ‘वोट-चोरी’ जैसे आरोपों के साथ प्रचार अभियान चलाने या सार्वजनिक बैठकों में ऐसी भाषा का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है।

नेताओं पर शपथ उल्लंघन का आरोप

याचिका में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे पर संसद में अपनी सीट ग्रहण करने से पहले ली गई शपथ के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग को ‘वोट-चोर’ कहना और इसकी छवि को प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में असंसदीय शब्दों के माध्यम से धूमिल करना गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है। यह याचिका न केवल कांग्रेस की गतिविधियों पर सवाल उठाती है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने की मांग भी करती है।

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