September 7, 2026

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पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष, जानें पूरी तिथि और कैलेंडर

पितृ पक्ष 2026

पितृ पक्ष 2026

पितृ पक्ष 2026 को लेकर लोगों के बीच इसकी तिथि और श्राद्ध कैलेंडर जानने की उत्सुकता है। पंचांग के अनुसार, इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026, शनिवार से होगी। वहीं इसका समापन 10 अक्तूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इस दौरान पूर्वजों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में पिंडदान का भी विशेष महत्व माना गया है।

पितृ पक्ष 2026 में पहली श्राद्ध तिथि कौन सी?

पितृ पक्ष 2026 के कैलेंडर के अनुसार 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पूर्णिमा श्राद्ध होगा। इसके बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध और 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध होगा। 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध रहेगा। इसके बाद 1 अक्तूबर को षष्ठी और 2 अक्तूबर को सप्तमी श्राद्ध किया जाएगा। इस तरह श्राद्ध पक्ष के दौरान अलग-अलग तिथियों पर पितरों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाएंगे।

अष्टमी से दशमी तक श्राद्ध की तिथियां

पितृ पक्ष 2026 में 3 अक्तूबर को अष्टमी श्राद्ध, 4 अक्तूबर को नवमी श्राद्ध और 5 अक्तूबर को दशमी श्राद्ध होगा। इसके बाद 6 अक्तूबर को एकादशी श्राद्ध और 7 अक्तूबर को द्वादशी श्राद्ध की तिथि रहेगी। 8 अक्तूबर को त्रयोदशी श्राद्ध और 9 अक्तूबर को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। श्राद्ध कैलेंडर के अनुसार, इसके बाद 10 अक्तूबर को अमावस्या के दिन सर्वपितृ श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है?

पितृ पक्ष 2026 का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होगा। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्तूबर 2026 की रात 9:35 बजे शुरू होगी और इसका समापन 10 अक्तूबर 2026 की रात 9:20 बजे होगा। इसी वजह से वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्तूबर, शनिवार को मान्य होगी। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती है।

पितृ पक्ष 2026 में श्राद्ध और पिंडदान का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष 2026 के दौरान पूर्वजों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इस अवधि में पिंडदान को भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि विधि-विधान से श्राद्ध कर्म और पिंडदान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्तूबर तक चलने वाले इस श्राद्ध पक्ष में तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा।

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