August 29, 2025

बिहार में गरमाई सियासत राहुल गांधी पर पीके का सीधा वार, क्या अब बदलेगी जनता की सोच?

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जल्द ही अपने बिहार दौरे पर आने वाले हैं। लेकिन उससे पहले ही जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने तीखा हमला बोलकर सियासी पारा चढ़ा दिया है।पीके ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी चुनाव से पहले बिहार घूमने आ रहे हैं। बेवकूफ बनाकर वोट लेने आ रहे हैं।

यह सिर्फ बयान नहीं, एक खुली चुनौती है। उन्होंने सीधे-सीधे सवाल उठाया कोविड के समय जब बिहार लौटे प्रवासी मज़दूर सड़कों पर थे, तब क्या राहुल गांधी ने कुछ किया?

राहुल गांधी पर सवाल, बिहार की राजनीति पर प्रहार

प्रशांत किशोर की बातें केवल राहुल गांधी तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने बिहार की पुरानी राजनीति पर भी करारा तंज कसा। जब डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें “नौसिखिया नेता” बताया, तो पीके ने पलटवार करते हुए कहा हाँ, मैं नौसिखिया हूं… अपहरण-रंगदारी करना नहीं जानता। यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि बिहार की दशकों पुरानी राजनीति पर तंज था — एक ऐसी राजनीति जो जनता के मुद्दों से ज्यादा जात-पात और गुंडागर्दी पर टिकी रही।नीतीश सरकार पर भी सवाल प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को भी नहीं बख्शा। उन्होंने पूछा 20 साल से बुज़ुर्गों को 400 रुपए मिल रहे थे, अब 1100 की घोषणा क्यों? ये बदलाव सरकार की सोच का नहीं, जनता की ताकत का नतीजा है।

बिहार की जनता ‘हनुमान’, पीके बने ‘जामवंत’

अपने भाषण में पीके ने एक दिलचस्प उपमा दी हम जामवंत हैं और बिहार की जनता हनुमान। हम उन्हें सिर्फ याद दिलाने आए हैं कि उनमें कितनी ताकत है।यह बयान इमोशनल अपील के साथ-साथ, जनता को जागरूक करने की कोशिश भी है कि अब समय है राजनीति के पुराने ढर्रे को बदलने का

अब असली सवाल क्या बदलेगी बिहार की राजनीति?

  • क्या बिहार की जनता अब भावनाओं से नहीं, हकीकत से वोट देगी?
  • क्या जाति के नाम पर वोट मांगने वाली राजनीति अब पीछे हटेगी?
  • क्या राहुल गांधी जैसे राष्ट्रीय नेताओं को जनता सीधा जवाब देगी?
  • और सबसे बड़ा सवाल क्या प्रशांत किशोर बिहार में बदलाव की शुरुआत बन पाएंगे?
  • क्या आप मानते हैं कि बिहार की राजनीति में बदलाव की ज़रूरत है?
  • क्या प्रशांत किशोर की बातें हकीकत के करीब हैं?
  • या फिर यह भी चुनावी रणनीति का हिस्सा भर है?

Share