प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी की मुलाकात कनाडा और ब्रिटेन के पूर्व केंद्रीय बैंक गवर्नर और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट एक्शन दूत मार्क कार्नी से हुई। यह मुलाकात ग्रीन फाइनेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रही।
बातचीत के मुख्य बिंदु:
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस महत्वपूर्ण बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि:
- ग्रीन फाइनेंस: भारत ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स में वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- क्लाइमेट एक्शन: भारत ने COP26 और अन्य मंचों पर जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने की दिशा में सक्रिय है। कार्बन न्यूट्रलिटी और रिन्युएबल एनर्जी टारगेट पर भी चर्चा हुई।
- टेक्नोलॉजी सहयोग: भारत और कनाडा के बीच ग्रीन टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड और जलवायु संबंधी रिसर्च में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
- वैश्विक स्थिरता में भारत की भूमिका: भारत खुद को एक ‘Solution Provider’ के तौर पर देख रहा है, जो विकासशील देशों के लिए मॉडल बन सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह बातचीत?
मार्क कार्नी वैश्विक ग्रीन फाइनेंस आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं। उनके साथ बातचीत से यह स्पष्ट है कि भारत न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रमुख साझेदार बनना चाहता है। इससे भारत को ग्रीन बॉन्ड्स, ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड और टेक्नोलॉजिकल साझेदारियों के जरिए अरबों डॉलर का निवेश प्राप्त हो सकता है।
क्या यह सिर्फ औपचारिकता है?
नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में भारत ग्लोबल ग्रीन फाइनेंस हब बनकर उभर सकता है और इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यावरण को होगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल भारत को वैश्विक जलवायु नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने वाली है। मार्क कार्नी जैसे प्रभावशाली वैश्विक नेताओं के साथ जुड़कर भारत न सिर्फ खुद को मजबूत कर रहा है, बल्कि एक हरित और टिकाऊ विश्व निर्माण की दिशा में भी अहम योगदान दे रहा है।

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