January 24, 2026

राहुल गांधी का सनसनीखेज दावा: वोटर लिस्ट में हेरफेर, लोकतंत्र पर खतरा?

वोटर लिस्ट में हेरफेर का गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। इस बार उनका निशाना चुनाव आयोग नहीं, बल्कि देश की वोटर लिस्ट में कथित तौर पर हो रही सुनियोजित हेरफेर है। राहुल गांधी ने दावा किया कि संगठित तरीके से सॉफ्टवेयर के जरिए वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक के ‘अलंद’ विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि एक बूथ लेवल अधिकारी की सतर्कता के कारण 6018 वोटों को हटाने की कोशिश पकड़ी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इन वोटरों ने नाम हटाने के लिए कोई आवेदन ही नहीं किया था।

सॉफ्टवेयर और फर्जीवाड़े का खेल

राहुल गांधी के मुताबिक, यह हेरफेर किसी एक व्यक्ति की गलती का नतीजा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि फर्जी मोबाइल नंबर, सॉफ्टवेयर के जरिए ऑटोमेटेड फॉर्म सबमिशन, और एक केंद्रीकृत सिस्टम के माध्यम से यह काम किया जा रहा है। यह सवाल उठता है कि आखिर वोटरों के नाम बिना उनकी सहमति के कैसे हटाए गए? कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरे मामले में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध है, क्योंकि वह कथित तौर पर इस हेरफेर को छिपाने में शामिल हैं।

चुनाव आयोग की चुप्पी, सवालों का जाल

कांग्रेस ने दावा किया कि कर्नाटक सीआईडी ने पिछले 18 महीनों में चुनाव आयोग को 18 बार पत्र लिखा, लेकिन आयोग ने बुनियादी जानकारी, जैसे कि IP एड्रेस, OTP लॉग्स, और डिवाइस की जानकारी, साझा करने से इनकार कर दिया। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आखिर क्यों इस तरह का डेटा छिपाया जा रहा है? क्या चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठना जायज नहीं है? राहुल गांधी ने इसे ‘हाइड्रोजन बम’ की शुरुआत करार देते हुए कहा कि असली खुलासा अभी बाकी है।

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लोकतंत्र पर मंडराता खतरा

अगर राहुल गांधी के दावों में सच्चाई है, तो यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे गंभीर धांधली हो सकती है। वहीं, अगर ये आरोप बेबुनियाद साबित हुए, तो इसे भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश के तौर पर भी देखा जा सकता है। सवाल यह नहीं कि राहुल गांधी क्या कह रहे हैं, बल्कि यह है कि क्या देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था, चुनाव आयोग, वाकई में पारदर्शी और निष्पक्ष है? क्या यह राजनीतिक दबाव का शिकार बन चुकी है?

जांच और सच्चाई की जरूरत

इस पूरे मामले में जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस या बयानबाजी से नहीं, बल्कि गहन जांच और पारदर्शी प्रक्रिया से मिलेगा। देश के हर नागरिक को यह जानने का हक है कि उनकी वोटर लिस्ट सुरक्षित है या नहीं। अगर वोटर लिस्ट में हेरफेर हो रहा है, तो यह न केवल लोकतंत्र के लिए खतरा है, बल्कि देश के हर मतदाता के अधिकारों का हनन भी है। इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आए और लोकतंत्र की नींव मजबूत रहे।

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