नई दिल्ली : संभल से सांसद जिया उर रहमान आज एक न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए। इस आयोग का गठन उन आरोपों की जांच के लिए किया गया था, जिनमें सांसद पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।सांसद जिया उर रहमान ने आयोग के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए और सभी आरोपों का खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि आरोप राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हैं।
क्या हैं आरोप?
जिया उर रहमान पर आरोप है कि उन्होंने चुनावी दौरान कुछ विवादास्पद बयान दिए थे, जो समाज में नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाले थे। इन आरोपों को लेकर कई विपक्षी दलों ने उनका विरोध किया था, लेकिन वे हमेशा अपने बयान को सही ठहराने का प्रयास करते रहे हैं।सांसद ने आयोग से यह भी कहा कि उनके खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद हैं और उनका मकसद केवल उनकी छवि को धूमिल करना है।
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जिया उर रहमान का बयान
मैंने हमेशा अपने निर्वाचन क्षेत्र और देश की भलाई के लिए काम किया है। यह आरोप राजनीति का हिस्सा हैं। मैं हर आरोप का जवाब देने के लिए तैयार हूं।
आयोग की भूमिका
न्यायिक आयोग अब इस मामले की पूरी जांच करेगा और यह तय करेगा कि सांसद के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है या नहीं। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया में कोई भी पक्षपाती कार्रवाई न हो।
इस मामले में आगे की सुनवाई की तिथि तय की जाएगी, और इस पर राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है।
राजनीतिक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है, खासकर उत्तर भारत में जहां समाजिक और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। विपक्षी दल इस मामले को लेकर आक्रामक हो सकते हैं, जबकि जिया उर रहमान ने अपनी बेगुनाही साबित करने की पूरी कोशिश की है।

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