January 14, 2026

समीर वानखेड़े बनाम शाहरुख खान “द बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड” विवाद और कोर्ट-ओटीटी ड्रामा

बॉलीवुड और कोर्ट का रिश्ता भी बड़ा फिल्मी है। हर हफ़्ते नया एपिसोड, नया ड्रामा। इस बार मंच पर हैं — आईआरएस अफसर समीर वानखेड़े और किंग खान का परिवार। जी हाँ, वही वानखेड़े जिन्होंने आर्यन खान ड्रग्स केस में सुर्खियाँ बटोरी थीं। अब उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है कि शाहरुख और गौरी की कंपनी रेड चिलीज़ की नई सीरीज़ “द बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड” उन्हें बदनाम कर रही है।

वानखेड़े का आरोप
वानखेड़े का कहना है कि यह सीरीज़ “झूठी, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक” है। केवल मानहानिकारक नहीं, बल्कि यह जनता का भरोसा भी तोड़ रही है। उनका कहना है कि ड्रग-विरोधी एजेंसियों को गलत रोशनी में दिखाकर आम लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है। वैसे भी एजेंसियों की इमेज लोगों की निगाह में वैसे ही “फाइव स्टार होटल वाली रेड” जैसी रहती है, और अब इस सीरीज़ ने इसे और खराब कर दिया।

दो अलग दुनिया, दो अलग मंच
जरा सोचिए — एक तरफ शाहरुख खान की दुनिया: रेड चिलीज़, नेटफ्लिक्स और चमकते प्रीमियर। और दूसरी तरफ वानखेड़े की दुनिया: कोर्ट की याचिकाएँ, कानूनी धाराएँ और अपमान की बातें। दोनों ही अपना-अपना शो चला रहे हैं। फर्क बस इतना है कि एक ओटीटी पर है और दूसरा न्यायपालिका के मंच पर।

जनता और दर्शकों के सवाल
अब असली सवाल यह है कि जनता इस शो को किस नजरिए से देखेगी। क्या सच में मानहानि हुई है, या यह बॉलीवुड-स्टाइल “पब्लिसिटी का गेम” है? दर्शक बस यही देख रहे हैं कि किसकी कहानी ज्यादा हिट होती है कोर्ट में या नेटफ्लिक्स पर।यह मामला सिर्फ मनोरंजन या कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है। यह बॉलीवुड, ओटीटी प्लेटफॉर्म और कानूनी दुनिया के बीच संतुलन की चुनौती को भी दिखाता है। साथ ही यह सवाल उठाता है कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि के बीच सीमा कहाँ खींची जानी चाहिए। दोनों ही पक्षों के लिए अब यह परीक्षा है कि वे अपनी कहानी और सच्चाई को किस तरह पेश करेंगे, और जनता इसे किस नजरिए से देखेगी।

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