करीब 20 साल पहले मनमोहन सिंह सरकार में सर्वसम्मति से पारित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने ग्रामीण भारत को मजबूती दी। यह योजना हर ग्रामीण परिवार को 100 दिनों का गारंटीड रोजगार प्रदान करती थी, जिससे करोड़ों गरीबों, मजदूरों और किसानों को कानूनी अधिकार मिला। पलायन रुका, गरीबी घटी और गांवों में ही रोजी-रोटी का इंतजाम हुआ। कोविड महामारी में मनरेगा गरीबों की लाइफलाइन साबित हुई। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने वाली क्रांतिकारी योजना थी।
VB-G RAM G बिल पर तीखा विरोध
हाल ही में संसद से पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल (VB-G RAM G) मनरेगा की जगह लेगा। इस बिल में रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए गए हैं, लेकिन सोनिया गांधी ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया। उनका आरोप है कि मोदी सरकार ने पिछले 11 सालों में मनरेगा को कमजोर किया और अब बिना चर्चा के इसका स्वरूप बदल दिया। महात्मा गांधी का नाम हटाया, केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया, फंडिंग में राज्यों का बोझ 40% किया और पंचायतों की भूमिका घटी। अब दिल्ली से तय होगा कि किसे कितना काम मिलेगा, जो जमीनी हकीकत से दूर है।
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कांग्रेस की लड़ाई का संकल्प
सोनिया गांधी ने वीडियो संदेश में कहा, “मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया। पहले गरीबों के हक की लड़ाई लड़ी थी, अब फिर लड़ूंगी।” कांग्रेस इस हमले का जवाब देगी। लाखों कार्यकर्ता किसानों, मजदूरों और गरीबों के साथ खड़े हैं। यह सियासी जंग संसद से सड़क तक जा सकती है, जहां मनरेगा के मूल अधिकारों की रक्षा होगी।

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