supriya shrinate का मोदी सरकार पर हमला, Gen-Z से जातिगत भेदभाव तक कही बड़ी बात
supriya shrinate
supriya shrinate ने ‘अनम्यूट भारत’ पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरकार और Gen-Z को लेकर कई तीखे बयान दिए। supriya shrinate ने कहा कि युवाओं के भीतर का डर खत्म हुआ है और आज की Gen-Z ज्ञान या उपदेश नहीं, बल्कि बराबरी का संवाद चाहती है। उन्होंने सरकार पर आंकड़े छिपाने और देर से जारी करने का आरोप लगाते हुए इसे देश की साख के लिए नुकसानदेह बताया। इसके अलावा जातिगत भेदभाव, स्मृति ईरानी की ट्रोलिंग और कंगना रनौत के बयानों पर भी उन्होंने अपनी बात रखी।
युवाओं के भीतर का डर खत्म हुआ
supriya shrinate ने कहा कि युवाओं ने उस डर को खत्म कर दिया है, जिसने उन्हें अपनी बात कहने से रोक रखा था। उन्होंने ‘छप्पन इंच की छाती’ और ‘स्ट्रॉन्ग मैन’ की छवि का जिक्र करते हुए कहा कि इस छवि को चुनौती देने वाले वही युवा हैं, जिन्हें गटर और दहशतगर्द कहा गया था। Gen-Z को लेकर उन्होंने कहा कि युवा प्रधानमंत्री से ज्ञान या मित्रों वाला संबोधन नहीं चाहते, बल्कि बराबरी से संवाद और अपने मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहते हैं।
सरकार आंकड़े छिपा रही है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए supriya shrinate ने कहा कि पहले संसद में मंत्री का बयान और सरकार का लिखित जवाब अंतिम माना जाता था। उनके मुताबिक अब देश के आंकड़ों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़े छिपा रही है या उन्हें देर से जारी कर रही है और जारी आंकड़ों की मैथडोलॉजी पर भी बहस हो रही है। खुद को बिजनेस जर्नलिस्ट रह चुकीं श्रीनेत ने इसे भारत की साख के लिए नुकसानदेह बताया।
supriya shrinate ने स्मृति ईरानी की ट्रोलिंग का सुनाया किस्सा
supriya shrinate ने स्मृति ईरानी की ट्रोलिंग का जिक्र करते हुए कहा कि अमेठी में हार के बाद जब उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा था, तब राहुल गांधी ने इसका विरोध किया था। श्रीनेत के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा था कि हार-जीत लगी रहती है और ट्रोलिंग बंद होनी चाहिए। इसके बाद ट्रोलिंग रुक गई। उन्होंने यह भी कहा कि स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के खिलाफ और संसद में सोनिया गांधी के साथ किस तरह व्यवहार किया, यह सभी ने देखा है।
जातिगत भेदभाव पर supriya shrinate ने साझा किया गांव का अनुभव
जातिगत भेदभाव पर बात करते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि वह उस तबके से आती हैं जिसने जाति का दंश नहीं झेला। उन्होंने अपने गांव जंगल जोगिया बारी का उदाहरण देते हुए बताया कि आरक्षित सीट से चुने गए प्रधान को लोग नाम से बुलाते थे, जबकि पहले के प्रधानों को ‘प्रधान जी’ कहा जाता था। उन्होंने जानबूझकर उन्हें ‘प्रधान जी’ कहना और बराबर कुर्सी पर बैठाना शुरू किया। श्रीनेत ने कहा कि जातिगत भेदभाव केवल गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली और मुंबई की पॉश सोसाइटियों में घरेलू सहायकों के लिए अलग बर्तन रखने जैसी प्रथा भी आज तक जारी है। कंगना रनौत को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेत्री से सांसद बनीं कंगना ने पूरी पीढ़ी को ‘गटर’ कहा। वहीं, अपनी राजनीतिक भविष्य की इच्छा बताते हुए श्रीनेत ने कहा कि वह महाराजगंज का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं और इसके लिए काम कर रही हैं।
