Tag: न्यायिक हिरासत

  • 26/11 आरोपी तहव्वुर राणा की याचिका पर 9 जून को सुनवाई, परिवार से बातचीत की मांग

    26/11 आरोपी तहव्वुर राणा की याचिका पर 9 जून को सुनवाई, परिवार से बातचीत की मांग

    2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले में शामिल माने जाने वाले आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा की एक याचिका पर दिल्ली की एक विशेष अदालत में 9 जून, 2025 को सुनवाई तय की गई है। यह याचिका राणा की ओर से तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए अपने परिवार से बातचीत की अनुमति मांगने के लिए दाखिल की गई थी।

    तहव्वुर राणा, जो पाकिस्तानी मूल का एक कनाडाई व्यापारी है, अमेरिका से प्रत्यर्पित होकर भारत लाया गया है। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और तिहाड़ जेल में बंद है। उस पर आरोप है कि वह 26/11 हमले के मुख्य साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी रहा है।

    कोर्ट ने जेल प्रशासन से मांगा जवाब

    विशेष न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपना विस्तृत जवाब कोर्ट में पेश करें। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के रुख को रिकॉर्ड पर लेते हुए जेल प्रशासन को उसकी एक प्रति भी सौंपने का आदेश दिया है ताकि वे इस पर जवाब दाखिल कर सकें।

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    NIA ने फिर जताई सुरक्षा पर आपत्ति

    एनआईए ने इससे पहले भी राणा की इसी तरह की मांग का विरोध किया था, जिसमें उसने आशंका जताई थी कि आरोपी अपने परिवार के सदस्यों के साथ गोपनीय या संवेदनशील जानकारी साझा कर सकता है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एजेंसी ने कहा कि इस तरह की अनुमति से जेल के भीतर से बाहरी संपर्क बन सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

    राणा की ओर से यह दलील दी गई थी कि उसके परिवार वाले उसकी मौजूदा स्थिति को लेकर काफी चिंतित हैं और वह उनसे सिर्फ सामान्य बातचीत करना चाहता है। हालांकि, इससे पहले अदालत ने सुरक्षा चिंताओं को आधार बनाकर उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। इस बार भी एनआईए ने उसका विरोध किया है, लेकिन अदालत अब तिहाड़ प्रशासन के जवाब के बाद ही कोई निर्णय लेगी।

    प्रत्यर्पण भारत के लिए बड़ी कामयाबी

    4 अप्रैल 2025 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राणा की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अंतिम समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उसे भारत लाया गया। यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत मानी जा रही है, क्योंकि राणा पर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों की साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। इन हमलों में 166 लोग मारे गए थे और देश को गहरा आघात पहुंचा था।

    अब फैसले पर टिकी नजरें

    अदालत की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि तहव्वुर राणा को अपने परिवार से बात करने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। यह मामला केवल एक बंदी की व्यक्तिगत मांग नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। अब 9 जून की सुनवाई पर देश की नजरें टिकी हैं।

  • कंगना रनौत ने शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी को बताया उत्पीड़न

    कंगना रनौत ने शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी को बताया उत्पीड़न

    बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी को उत्पीड़न करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार से अपील की है कि वे राज्य को “नॉर्थ कोरिया” जैसा न बनाएं। शर्मिष्ठा को कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों के लिए हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में कई राजनेताओं ने शर्मिष्ठा के समर्थन में आवाज उठाई है।

    गिरफ्तारी का विवरण

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार देर रात शर्मिष्ठा पनोली को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली साम्प्रदायिक टिप्पणियों का आरोप है। शनिवार को उन्हें कोलकाता लाया गया और 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। शर्मिष्ठा ने अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी और संबंधित पोस्ट हटा दी थी, फिर भी पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।

    कंगना रनौत का बयान

    कंगना रनौत ने इस गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा, “किसी ने माफी मांग ली और पोस्ट हटा लिया, फिर भी उसे जेल में डालना, प्रताड़ित करना, उसका करियर खत्म करना और चरित्र पर सवाल उठाना बहुत गलत है। किसी बेटी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “सबको लोकतांत्रिक अधिकार हैं। शर्मिष्ठा ने अपनी आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए माफी मांगी है। आज की पीढ़ी ऐसी भाषा का इस्तेमाल सामान्य रूप से करती है। उसे जल्द रिहा करना चाहिए, क्योंकि वह बहुत युवा है और उसका पूरा करियर और जीवन सामने है।” कंगना ने ममता बनर्जी सरकार से आग्रह किया कि वे पश्चिम बंगाल को नॉर्थ कोरिया जैसा न बनाएं, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया जाता है।

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    अन्य नेताओं का समर्थन

    शर्मिष्ठा के समर्थन में कई राजनेताओं ने आवाज उठाई है। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने पश्चिम बंगाल पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा, “ईशनिंदा की हमेशा निंदा होनी चाहिए, लेकिन सेकुलरिज्म कुछ के लिए ढाल और दूसरों के लिए तलवार नहीं हो सकता। यह दोतरफा होना चाहिए।” पवन कल्याण ने पुलिस से निष्पक्षता बरतने की मांग की। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी नेता सुवेंदू अधिकारी ने टीएमसी सरकार पर केवल “सनातनियों” के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह पक्षपातपूर्ण रवैया लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

    मामले का सामाजिक प्रभाव

    शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां गंभीर अपराध हैं। इस मामले ने पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। कंगना और अन्य नेताओं के बयानों ने इस मामले को और तूल दे दिया है।

    आगे की राह

    शर्मिष्ठा की रिहाई को लेकर उनके समर्थक और कई संगठन आवाज उठा रहे हैं। इस मामले में कोर्ट के अगले फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह मामला न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बल्कि सोशल मीडिया के उपयोग और उसकी सीमाओं पर भी बहस को जन्म दे रहा है। क्या शर्मिष्ठा को जल्द रिहा किया जाएगा, या यह मामला और लंबा खिंचेगा, यह देखना बाकी है।