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  • लोकसभा में तीन विवादास्पद विधेयकों पर हंगामा, जेपीसी गठन की तैयारी

    लोकसभा में तीन विवादास्पद विधेयकों पर हंगामा, जेपीसी गठन की तैयारी

    विधेयकों का परिचय और विवाद

    20 अगस्त 2025 को लोकसभा में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण और विवादास्पद विधेयक पेश किए, जिनमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं। इनमें से संविधान संशोधन विधेयक विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिनों तक गिरफ्तारी या हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इन विधेयकों को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव पर इन्हें 21 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का निर्णय लिया गया।

    विपक्षी गठबंधन, इंडिया गठबंधन, ने जेपीसी की बैठकों का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जिससे संसद में तनाव और बढ़ गया है। इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है और इन विधेयकों पर व्यापक चर्चा के लिए जेपीसी के गठन की प्रक्रिया को तेज करने की बात कही है।

    ओम बिरला का बयान: संसदीय समितियों की भूमिका

    भुवनेश्वर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसदीय समितियां दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन समितियों में सभी सदस्य अपनी बात खुलकर रख सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके। बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से जेपीसी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, “हम जल्द ही व्यापक चर्चा के लिए जेपीसी का गठन करेंगे।”

    बिरला ने संसद और विधानसभाओं में हो रही पूर्व नियोजित रुकावटों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी रुकावटें लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं। उनके अनुसार, संसद और विधानसभाएं चर्चा और असहमति के मंच हैं, जो लोकतंत्र की ताकत को दर्शाते हैं। बिरला ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक बहस की उम्मीद करती है, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।

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    जेपीसी और सरकार की रणनीति

    लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार सभी दलों के साथ बातचीत कर रही है ताकि जेपीसी में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि यह समिति विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श करेगी और सभी पक्षों को अपनी राय रखने का अवसर देगी। बिरला ने जोर देकर कहा कि विधायी निकायों को राष्ट्रीय हित में व्यापक बहस सुनिश्चित करनी चाहिए।

    विपक्ष के बहिष्कार के फैसले के बावजूद, सरकार जेपीसी के माध्यम से इन विधेयकों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। बिरला ने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद में होने वाली बहसें रचनात्मक और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप हों।

    लोकतंत्र में चर्चा की अहमियत

    ओम बिरला ने अपने बयान में लोकतंत्र में असहमति और चर्चा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसद का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं को उठाना और उनके समाधान के लिए कानून बनाना है। पूर्व नियोजित रुकावटें इस प्रक्रिया को बाधित करती हैं, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। बिरला ने सभी दलों से अपील की कि वे राष्ट्रीय हित में सहयोग करें और संसद को एक रचनात्मक मंच के रूप में उपयोग करें।

    इन तीनों विधेयकों पर संसद में होने वाली चर्चा और जेपीसी की भूमिका आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगी। सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाएगी या नहीं, यह देखना बाकी है।

  • RSS के शताब्दी समारोह की तैयारियां शुरू, अमित शाह ने स्वयंसेवक के रूप में जताया गर्व

    RSS के शताब्दी समारोह की तैयारियां शुरू, अमित शाह ने स्वयंसेवक के रूप में जताया गर्व

    नागपुर में शताब्दी समारोह की तैयारियां

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन की तैयारियों में जुट गया है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मुख्यालय में विजयादशमी के अवसर पर होने वाले इस विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। दलित समुदाय से आने वाले कोविंद को चीफ गेस्ट बनाकर आरएसएस ने समावेशिता और सामाजिक एकता का एक बड़ा संदेश दिया है। यह आयोजन न केवल आरएसएस के 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को दर्शाएगा, बल्कि संगठन के मूल्यों और भारत के विकास में इसके योगदान को भी रेखांकित करेगा।

    बीजेपी और आरएसएस का मजबूत गठजोड़

    इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उपराष्ट्रपति पद के लिए आरएसएस से जुड़े सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह कदम बीजेपी और आरएसएस के बीच गहरे रिश्ते को और मजबूत करता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में केरल के कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में खुद को आरएसएस का स्वयंसेवक बताते हुए गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं बीजेपी से आता हूं और आरएसएस का स्वयंसेवक हूं। जब तक भारत महान नहीं बन जाता, तब तक हमें आराम करने का अधिकार नहीं है।” शाह ने अपने संबोधन में भारत को विश्व में सम्मानित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का सपना दोहराया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के अनुरूप है।

    केरल की एलडीएफ सरकार पर अमित शाह का निशाना

    मनोरमा न्यूज के कॉन्क्लेव में अमित शाह ने केरल की वामपंथी एलडीएफ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने कैडर के लिए फंड खर्च कर रही है, जबकि केरल की जनता ऐसी सरकार चाहती है जो उनके लिए काम करे। शाह ने कहा कि केरल में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण विकास अवरुद्ध हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी विधानसभा चुनावों में केरल की जनता बदलाव और विकास के लिए मतदान करेगी। गौरतलब है कि केरल में अगले साल चुनाव होने हैं, और बीजेपी ने राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए राजीव चंद्रशेखर को जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बीजेपी के करीब होने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।

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    भारत के विकास में आरएसएस की भूमिका

    अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जब कभी भारत के विकास का इतिहास लिखा जाएगा, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्षों के कार्यकाल का विशेष उल्लेख होगा। उन्होंने आरएसएस के स्वयंसेवकों और देशवासियों से अपील की कि वे भारत को विश्व में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें। आरएसएस का शताब्दी समारोह न केवल संगठन की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है। इस आयोजन के जरिए आरएसएस समाज के हर वर्ग को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को और सशक्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

    आगे की राह

    केरल के बाद अमित शाह तमिलनाडु का दौरा करने वाले हैं, जहां बीजेपी दक्षिण भारत में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है। आरएसएस के शताब्दी समारोह और बीजेपी की रणनीति से यह स्पष्ट है कि दोनों संगठन मिलकर भारत को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह आयोजन और नेताओं के बयान देश में एक नए उत्साह और एकजुटता का संदेश दे रहे हैं।

  • पीएम मोदी ने की अमित शाह की तारीफ: गृह मंत्री के रूप में नई ऊंचाइयों की ओर

    पीएम मोदी ने की अमित शाह की तारीफ: गृह मंत्री के रूप में नई ऊंचाइयों की ओर

    सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गृह मंत्री

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा करते हुए उन्हें देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गृह मंत्री के रूप में सम्मानित किया। नई दिल्ली में आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि शाह ने पूर्व गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने उत्साहपूर्वक कहा, “यह तो अभी शुरुआत है, अभी और आगे जाना है।” इस बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है, और इसे शाह के लिए एक बड़ी भूमिका के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    मोदी-शाह की अटूट साझेदारी

    नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी भारतीय राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली साझेदारी के रूप में उभरी है। गुजरात में शुरू हुआ यह रिश्ता पिछले दो दशकों में और मजबूत हुआ है। शाह, जो लंबे समय से मोदी के विश्वासपात्र रहे हैं, ने गुजरात में उनके साथ मिलकर बीजेपी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस जोड़ी ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी की रणनीति और सफलता को नई दिशा दी है। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, “प्रधानमंत्री का यह बयान दोनों नेताओं के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि करता है और पार्टी के भीतर स्पष्ट नेतृत्व संरचना को दर्शाता है।”

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    शाह की उपलब्धियां और योगदान

    अमित शाह को गृह मंत्री के रूप में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हैं। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद को कम करने, आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने जैसे महत्वपूर्ण कदमों में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, समान नागरिक संहिता जैसे वैचारिक मुद्दों को आगे बढ़ाने में भी उनकी सक्रियता उल्लेखनीय रही है। शाह की कार्यशैली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के साथ-साथ व्यावहारिक राजनीतिक निर्णय लेने की क्षमता स्पष्ट झलकती है। उनकी ये खूबियां उन्हें बीजेपी के लिए एक अपरिहार्य नेता बनाती हैं।

    चुनावी रणनीति के ‘चाणक्य’

    अमित शाह को बीजेपी के चुनावी रणनीति के ‘चाणक्य’ के रूप में जाना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में उनकी अगुवाई में बीजेपी ने 80 में से 71 सीटें जीतकर इतिहास रचा। उनकी सामाजिक इंजीनियरिंग और संगठनात्मक कौशल की व्यापक प्रशंसा हुई। उसी वर्ष उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी को नए आयाम दिए। 2017 में उत्तर प्रदेश में 14 साल बाद बीजेपी की सत्ता में वापसी और असम, मणिपुर, त्रिपुरा जैसे राज्यों में पार्टी की जीत शाह के संगठन प्रबंधन और बूथ-स्तरीय रणनीति का परिणाम थी।

    भविष्य की संभावनाएं

    प्रधानमंत्री मोदी का शाह के प्रति यह समर्थन उनकी क्षमता और योग्यता को मान्यता देता है। यह बयान न केवल शाह की उपलब्धियों को रेखांकित करता है, बल्कि उनके भविष्य में और बड़ी जिम्मेदारी संभालने की संभावना को भी दर्शाता है। पार्टी के भीतर और बाहर यह संदेश स्पष्ट है कि शाह बीजेपी और देश की राजनीति में एक केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे। उनकी रणनीतिक दृष्टि और संगठनात्मक कौशल पीएम मोदी के विजन को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।

  • अमित शाह का बड़ा बयान: ईरान-इजरायल युद्ध से भारत को कोई खतरा नहीं

    अमित शाह का बड़ा बयान: ईरान-इजरायल युद्ध से भारत को कोई खतरा नहीं

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को लेकर भारतवासियों को आश्वस्त किया है कि इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का भारत पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत न केवल सुरक्षित है, बल्कि आज निवेश और व्यापार के लिए दुनिया की सबसे मजबूत जगहों में से एक है।

    भारत को खतरा नहीं, बल्कि अवसर है

    अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर जो उथल-पुथल चल रही है, उसे भारत एक चुनौती नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा, “भारत में लोकतंत्र मजबूत है, नीतियां पारदर्शी हैं और यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बड़ी संख्या में ग्राहक और कुशल जनशक्ति भारत को वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।”

    अर्थव्यवस्था में मजबूती और भविष्य की दिशा

    गृह मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि दुनिया में आर्थिक अनिश्चितताएं हैं, लेकिन भारत उनसे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि “किसी भी देश को बिना चुनौतियों के विकास नहीं मिलता। भारत इन चुनौतियों को स्वीकार कर रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।”

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    विकास दर और वैश्विक तुलना

    अमित शाह ने यह भी बताया कि अगर भारत की विकास दर 8% तक नहीं भी पहुंचती, तब भी भारत एक विकसित देश बन सकता है। “हमें अपनी विकास दर को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। भारत आज दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और हमारी गति भी उसी स्तर पर है।”

    उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं ठप हो गई थीं, भारत ने अपनी विकास दर को संभाले रखा और विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहा।

    निवेश पर भ्रम नहीं, विश्वास होना चाहिए

    कुछ आलोचकों द्वारा भारत से निवेश बाहर जाने की बात पर शाह ने कहा, “यह तो अच्छी बात है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपना विस्तार कर रही हैं। इससे भारत की शक्ति का प्रदर्शन होता है।”

    उन्होंने बताया कि पिछले 11 सालों में भारत में FDI (विदेशी निवेश) 143% बढ़कर 749 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि यूपीए सरकार के समय यह आंकड़ा काफी कम था। “हमें नकारात्मक सोच छोड़कर, भारतीय कंपनियों की सफलता का स्वागत करना चाहिए।”

  • अमित शाह बोले: अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द होगी शर्म, भाषाई आत्मसम्मान जरूरी

    अमित शाह बोले: अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द होगी शर्म, भाषाई आत्मसम्मान जरूरी

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर देश की भाषाई पहचान को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने गुरुवार को एक पुस्तक विमोचन समारोह में कहा कि भारत को अपनी भाषाई विरासत पर गर्व करना चाहिए, न कि विदेशी भाषा अंग्रेजी पर निर्भर रहना चाहिए। शाह का यह बयान उस समय आया है जब देश में नई शिक्षा नीति (NEP) और त्रिभाषा फार्मूले को लेकर कई राज्यों में विरोध देखा जा रहा है।

    “जल्द शर्म आएगी अंग्रेजी बोलने वालों को”

    अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह समय दूर नहीं जब भारत में अंग्रेजी बोलने वाले लोग खुद को लेकर शर्म महसूस करेंगे। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म को विदेशी भाषा में नहीं समझ सकता। भारत की आत्मा उसकी देशी भाषाओं में ही बसती है।” शाह ने अंग्रेजी को औपनिवेशिक गुलामी का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मानसिक गुलामी से बाहर निकलने का समय है।

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    देशी भाषाएं: भारत की असली पहचान

    गृह मंत्री का मानना है कि भारतीय भाषाएं न केवल संवाद का माध्यम हैं, बल्कि वे संस्कृति, परंपरा और मूल्यबोध की वाहक भी हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा में शिक्षा या संवाद से व्यक्ति अपने मूल से कट जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा में शिक्षित किया जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय सोच और संस्कारों को आत्मसात कर सकें।

    शिक्षा नीति और ‘हिंदी थोपने’ का विवाद

    शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फार्मूले को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों और विपक्षी दलों में असंतोष व्याप्त है। इन दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार हिंदी को थोप रही है। हालांकि, केंद्र का कहना है कि यह नीति देश की विविधता को ध्यान में रखकर बनाई गई है और इसका उद्देश्य मातृभाषा को प्राथमिकता देना है, न कि कोई एक भाषा थोपना।

    “भारत को अपनी भाषाओं में चलाना होगा”

    शाह ने अपने भाषण में यह भी कहा कि एक आत्मनिर्भर, आत्मगौरव से भरा हुआ भारत तभी बन सकता है जब वह अपनी भाषाओं में सोचने, समझने और निर्णय लेने लगे। उन्होंने जोर दिया कि भारत को अपनी भाषाओं में ही चलाना होगा और दुनिया का नेतृत्व भी इसी आत्मविश्वास से किया जा सकता है।

    भाषाई एकता, वैविध्य और आत्मसम्मान

    अंत में शाह ने कहा कि यह लड़ाई कठिन जरूर है, लेकिन भारतीय समाज इसे जीतने में सक्षम है। उन्होंने देशवासियों से अपनी भाषाओं के प्रति सम्मान और गर्व की भावना अपनाने की अपील की। उनके अनुसार, भाषाई विविधता ही भारत की शक्ति है और इसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

  • बीएसएफ ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी चौकियों को किया ध्वस्त: अमित शाह का बयान

    बीएसएफ ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी चौकियों को किया ध्वस्त: अमित शाह का बयान

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत बीएसएफ ने पाकिस्तानी सेना के 118 से अधिक बुनियादी ढांचे को नष्ट और क्षतिग्रस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह हमला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है, जिसकी मरम्मत में कई साल लगेंगे।

    ऑपरेशन सिंदूर का महत्व

    अमित शाह ने बताया कि पाकिस्तान ने भारतीय आतंकवाद विरोधी अभियानों का जवाब सीमाओं और नागरिक इलाकों पर हमला कर दिया था, जिस पर बीएसएफ ने कड़ा और सटीक जवाब दिया।बीएसएफ के जवानों ने दुश्मन की निगरानी प्रणाली को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया, जिसे पुनः बनाने में चार से पांच साल लगेंगे। यह साबित करता है कि भारत की सीमा सुरक्षा सतर्क और मजबूत है।

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    गृह मंत्री अमित शाह का बयान

    ऐसी बहादुरी तभी सामने आती है जब दिल में देशभक्ति का जुनून हो। हमारे बीएसएफ जवान बिना यह सोचे कि सीमा कहां है, हर हमले का सामना करते हैं।उन्होंने कहा कि सीमा पर किसी भी तरह के हमले का सबसे बड़ा खामियाजा बीएसएफ जवानों को भुगतना पड़ता है, फिर भी उनका हौसला बुलंद रहता है।

    पुंछ में सुरक्षा स्थिति और मानवता का जज़्बा

    अमित शाह ने पुंछ जिले का दौरा कर वहां हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि वे गुरुद्वारों, मंदिरों, मस्जिदों और नागरिक आबादी को हुए नुकसान के बाद वहां पहुंचे और लोगों का दुख साझा किया। मौसम खराब होने के बावजूद वे सड़क मार्ग से पहुंचे ताकि जवानों से मिल सकें।उत्तर भारत के लोगों ने अमित शाह के बयान और बीएसएफ की बहादुरी की जमकर सराहना की है। हर कोई बीएसएफ जवानों के इस साहस और देशभक्ति पर गर्व महसूस कर रहा है।