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  • उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

    उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

    देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद यानी उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस की अगुवाई वाले इस गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गी सुदर्शन रेड्डी को अपना साझा उम्मीदवार चुना है। इस फैसले के पीछे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

    एनडीए की ओर से तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन के नाम की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की ओर से तमिल बनाम तमिल मुकाबले से बचने के लिए रणनीतिक फैसला लिया गया है।

    गैर-राजनीतिक चेहरे पर सहमति

    सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की बैठकों में कई नामों पर चर्चा हुई थी।

    • एनसीपी ने महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी का नाम प्रस्तावित किया था।
    • डीएमके ने अपने वरिष्ठ नेता तिरुचि शिवा को मैदान में उतारने की कोशिश की।
    • वहीं एक नाम पूर्व इसरो वैज्ञानिक एम. अन्नादुरई का भी चर्चा में रहा।

    लेकिन आखिरकार ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने जोर दिया कि विपक्ष को एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष छवि वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए। उनका यह भी तर्क था कि यदि विपक्ष तमिलनाडु से ही किसी नेता को मैदान में उतारता है, तो मुकाबला तमिल बनाम तमिल बन जाएगा, जिससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

    ममता बनर्जी की निर्णायक भूमिका

    TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने गठबंधन की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए राजनीति से दूर व्यक्ति को ही चुना जाना चाहिए।
    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को NDA के जाल में नहीं फंसना चाहिए, जिसमें वे क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर सियासी लाभ उठाना चाहते हैं।

    TMC की इस दलील को कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों ने भी अंततः स्वीकार कर लिया और गी सुदर्शन रेड्डी के नाम पर सर्वसम्मति बन गई।

    गी सुदर्शन रेड्डी कौन हैं?

    गी सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और वे न्यायपालिका में अपनी निष्पक्षता, निष्कलंक छवि और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। वे राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिष्ठा बहुत मजबूत रही है। विपक्ष को उम्मीद है कि एक साफ-सुथरी छवि वाला उम्मीदवार NDA के खिलाफ एक मजबूत नैतिक चुनौती पेश करेगा।

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    टीएमसी की बदली भूमिका

    2022 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में TMC ने वोटिंग से दूरी बनाई थी और उस वक्त कांग्रेस उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को बड़ा झटका लगा था। TMC ने तब आरोप लगाया था कि उम्मीदवार तय करते समय उनसे सलाह नहीं ली गई थी।

    लेकिन इस बार TMC पूर्ण सक्रियता के साथ गठबंधन की बैठकों में शामिल रही और न केवल उम्मीदवार के चयन में बल्कि चुनावी रणनीति तय करने में भी मुख्य भूमिका निभाई।

  • ठाकरे बंधुओं का गठबंधन: बीएमसी और बेस्ट पतपेढी चुनाव में नई शुरुआत

    ठाकरे बंधुओं का गठबंधन: बीएमसी और बेस्ट पतपेढी चुनाव में नई शुरुआत

    महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया अक्टूबर के अंत से शुरू होने वाली है, जिसमें मुंबई का प्रतिष्ठित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव भी शामिल है। इस बार चुनावी मैदान में ठाकरे बंधुओं—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—के बीच गठबंधन की संभावना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। दोनों भाईयों ने इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए बेस्ट पतपेढी (क्रेडिट सोसाइटी) के आगामी चुनाव में एकजुट होकर उतरने का फैसला किया है। यह गठबंधन न केवल बेस्ट पतपेढी के 18 अगस्त को होने वाले चुनाव के लिए है, बल्कि बीएमसी चुनाव के लिए भी एक संभावित रणनीति का संकेत देता है।

    बेस्ट पतपेढी चुनाव में एकजुटता

    उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने बेस्ट पतपेढी चुनाव के लिए एक साझा ‘उत्कर्ष पैनल’ तैयार किया है। इस पैनल में शिवसेना (यूबीटी) की बेस्ट कामगार सेना और मनसे कर्मचारी सेना के उम्मीदवार शामिल हैं। दोनों पार्टियों के नेताओं ने इसे गठबंधन की औपचारिक घोषणा तक का अस्थायी कदम बताया है। बेस्ट कामगार सेना के अध्यक्ष सुहास सामंत ने पर्चों के माध्यम से इस गठबंधन का प्रचार शुरू कर दिया है। वर्तमान में कामगार सेना का इस क्षेत्र में दबदबा है, और मनसे का साथ इसे और मजबूती दे सकता है।

    मराठी अस्मिता ने जोड़ा एक मंच पर

    पिछले महीने, 5 जुलाई को उद्धव और राज ठाकरे लगभग दो दशकों बाद एक मंच पर नजर आए। इस दौरान दोनों ने महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता को केंद्र में रखकर अपनी एकता का प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने दोनों भाइयों के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उद्धव के जन्मदिन पर राज ठाकरे का मातोश्री पहुंचना और उन्हें बधाई देना भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। शिवसैनिक इसे 19 साल बाद दोनों भाइयों के सार्वजनिक मंच पर एक साथ आने और 13 साल बाद राज के मातोश्री दौरे को शुभ संकेत मान रहे हैं।

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    बीएमसी चुनाव में गठबंधन की संभावना

    मुंबई के बीएमसी चुनाव, जो स्थानीय निकाय चुनावों के तीसरे और अंतिम चरण में होने की संभावना है, इस गठबंधन के लिए एक बड़ा मंच हो सकता है। कांग्रेस ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि यदि उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) इंडिया अलायंस के तहत कोई उप-गठबंधन करती है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। यह गठबंधन न केवल बीएमसी चुनाव में दोनों पार्टियों की स्थिति को मजबूत कर सकता है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी एक नया समीकरण बना सकता है।

    मनसे की सक्रियता बढ़ी

    उद्धव ठाकरे के साथ नजदीकी के बाद राज ठाकरे की मनसे में भी नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। बेस्ट पतपेढी चुनाव में गठबंधन के साथ-साथ मनसे कार्यकर्ता सक्रिय होकर प्रचार में जुट गए हैं। यह गठबंधन दोनों पार्टियों के लिए एक रणनीतिक कदम है, जो भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की एकजुटता को और मजबूत कर सकता है।

  • बिहार चुनाव में तेजस्वी यादव होंगे CM चेहरा, कन्हैया कुमार ने किया साफ ऐलान

    बिहार चुनाव में तेजस्वी यादव होंगे CM चेहरा, कन्हैया कुमार ने किया साफ ऐलान

    बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर जारी अटकलों पर विराम लग गया है। कांग्रेस के युवा नेता और राहुल गांधी के करीबी कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार होंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में इस मुद्दे पर कोई विवाद या असमंजस नहीं है।

    कन्हैया कुमार का यह बयान खास मायने रखता है, क्योंकि अतीत में तेजस्वी और कन्हैया के संबंधों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाएं रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब कन्हैया ने वाम दल के टिकट पर बेगूसराय से चुनाव लड़ा था, तब तेजस्वी ने उनका खुलकर समर्थन नहीं किया था। अब उसी कन्हैया ने आगे आकर तेजस्वी को समर्थन देकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है।

    कन्हैया ने कहा कि महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है, और स्वाभाविक तौर पर उसी का नेता मुख्यमंत्री पद का चेहरा होगा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह जनता और संख्याबल तय करेगा। तेजस्वी यादव के पास सबसे बड़ा समर्थन होगा और वही मुख्यमंत्री बनेंगे।”

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    ‘चेहरे की नहीं, मुद्दों की राजनीति जरूरी’

    कन्हैया ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए चेहरे को लेकर बहस करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा, पलायन, अपराध, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर महागठबंधन चुनाव लड़ेगा।

    कन्हैया ने ‘सीनियर-जूनियर’ जैसे तमगों को खारिज करते हुए कहा कि “महागठबंधन में हर घटक दल महत्वपूर्ण है, जैसे गाड़ी में ब्रेक, क्लच और मिरर सभी जरूरी होते हैं।” कांग्रेस, वाम दल और आरजेडी सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और 243 सीटों पर मिलकर रणनीति बनाएंगे।

    बीजेपी पर भी साधा निशाना

    कन्हैया ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी नीतीश कुमार को हटाकर अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। उन्होंने यह भी पूछा कि “जब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा था कि नीतीश जी के लिए सभी दरवाजे बंद हैं, तो क्या वे ब्लूटूथ से एनडीए में डाउनलोड हो गए?”

    उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा बिहार में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों को उठाने से बच रही है, क्योंकि जनता सेना या राष्ट्रवाद पर राजनीति पसंद नहीं करती।